विद्या भारती शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित नव चयनित आचार्य विकास वर्ग में शुक्रवार को एक प्रेरणादायी एवं मार्गदर्शक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विद्या भारती कोटा के अध्यक्ष महावीर प्रसाद शर्मा गौतम ने आचार्यों और कार्यकर्ताओं को संगठन के मूल उद्देश्यों एवं शिक्षा दर्शन से अवगत कराया।

अपने संबोधन में गौतम ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रभक्ति, संस्कार, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना से युक्त व्यक्तित्व का निर्माण करना भी है। उन्होंने बताया कि विद्या भारती ऐसी राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली के विकास के लिए सतत कार्य कर रही है, जिसके माध्यम से शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक रूप से पूर्ण विकसित युवा पीढ़ी तैयार की जा सके।

उन्होंने कहा कि ऐसी युवा शक्ति जीवन की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने के साथ-साथ समाज के वंचित, अभावग्रस्त और उपेक्षित वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित भाव से कार्य करेगी। साथ ही वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को आत्मसात कर विश्वकल्याण में भी अपना योगदान देगी।

कार्यक्रम में उपाध्यक्ष छीतरलाल गुर्जर, आदर्श विद्या मंदिर समिति के जिला सचिव राजेंद्र शर्मा, शिशु वाटिका प्रमुख गिर्राज वर्मा, सेवा प्रमुख घासीलाल मेघवाल सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इस अवसर पर हिंदू साम्राज्य दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया तथा छत्रपति शिवाजी महाराज के राष्ट्रनिर्माण, स्वाभिमान और हिंदवी स्वराज्य के आदर्शों का स्मरण कराया गया।

कार्यक्रम के समापन पर वर्ग की संचालन टोली का सम्मान कर उनके उत्कृष्ट योगदान की सराहना की गई। आयोजन ने शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण और संस्कारयुक्त युवा पीढ़ी के निर्माण के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करने का संदेश दिया।

Pratahkal Bureau

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