शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्रवान एवं संस्कारित नागरिकों का निर्माण करना है। इसी पावन ध्येय को चरितार्थ करते हुए विद्या भारती द्वारा पांच दिवसीय प्रांतीय आधारभूत विषय एवं खेल प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य आयोजन भरतपुर के जवाहर नगर स्थित डॉक्टर यशपाल उर्मलेश आर्य बालिका उच्च माध्यमिक आदर्श विद्या मंदिर में किया जा रहा है। बालकों के सर्वांगीण विकास को समर्पित इस कार्यशाला का उद्देश्य भावी पीढ़ी को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सुदृढ़ बनाना है।

इस महत्वपूर्ण वर्ग के द्वितीय दिवस के वंदना सत्र में गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध मनोचिकित्सक एवं विचारक डॉ. प्रदीप डागुर ने की। इस अवसर पर विद्या भारती संस्थान जयपुर के प्रांत सचिव लक्ष्मण सिंह राठौड़, क्षेत्र के योग प्रमुख राजेंद्र कुमार, प्रांत निरीक्षक अरुण कुमार दुबे, जिला सचिव संतोष कुमार कटारा, रमेश चंद्र शर्मा तथा सत्यनारायण मिश्रा ने मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर सत्र का विधिवत शुभारंभ किया। सत्र को संबोधित करते हुए अध्यक्ष डॉ. प्रदीप डागुर ने गुरुजनों और विद्यार्थियों को सजगता, संवेदनशीलता और सम्मान यानी 'अवेयरनेस, केअर व रेस्पेक्ट' पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।






कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रांत सचिव लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने शिक्षा के गूढ़ रहस्यों को उजागर करते हुए कहा कि बालक का पंचकोशात्मक विकास केवल आधारभूत विषयों के गहन अध्ययन से ही संभव है। इसी दूरगामी सोच को ध्यान में रखते हुए विद्या भारती ने बालक के सर्वांगीण विकास हेतु अपने पाठ्यक्रम में पांच आधारभूत विषयों को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया है, जिसमें क्रमशः शारीरिक शिक्षा, योग शिक्षा, संगीत शिक्षा, संस्कृत शिक्षा और नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा शामिल हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंचकोशात्मक विकास के लिए ये आधारभूत विषय नितांत आवश्यक हैं।

इस वैचारिक समागम के अवसर पर शिक्षा जगत और संस्थान से जुड़े अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे, जिनमें अरुण कुमार दुबे, रमेश चंद्र शर्मा, सत्यनारायण शर्मा, होतीलाल जैमन, महीपाल प्रजापति, कमलेश गौतम, नरेश जादौन, प्रह्लाद सिंह, मनीष कुमार बेदी, चैतन्य प्रकाश अग्रवाल, चयनिका शर्मा, राजेश कुमार शर्मा, महावीर सिंह, शम्भू दयाल, सुजीत कुमार झां, शरद कुमार शर्मा तथा लोकेश चन्द्र जैन शामिल हैं। कार्यक्रम के अंत में जिला सचिव संतोष कटारा ने सभी आगंतुक अतिथियों का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत वंदे मातरम के गान के साथ इस प्रेरणादायी सत्र का समापन हुआ, जो राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका को एक नई दिशा प्रदान करता है।

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