विद्या भारती: श्रीराम आरावकर ने भारतीय जीवन दर्शन को बताया विश्व शांति का मार्ग
कोटा के स्वामी विवेकानंद विद्या निकेतन में आयोजित प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग में श्रीराम आरावकर ने पाश्चात्य संस्कृति और भारतीय जीवन दृष्टि के अंतर को स्पष्ट किया।

विद्या भारती राजस्थान क्षेत्र के तत्वावधान में महावीर नगर तृतीय स्थित स्वामी विवेकानंद विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित 11 दिवसीय क्षेत्रीय प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग के आठवें दिन अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री श्रीराम आरावकर का ओजस्वी पाथेय प्राप्त हुआ। अपने प्रेरक उद्बोधन में श्री आरावकर ने वैश्विक अशांति के समाधान हेतु भारतीय जीवन दर्शन को एकमात्र मार्ग बताते हुए कहा कि वर्तमान विश्व में व्याप्त संघर्ष, असंतोष और अराजकता का मूल कारण पाश्चात्य भोगवादी जीवन दृष्टि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ पाश्चात्य संस्कृति केवल स्वार्थ और अस्तित्व के संघर्ष की बात करती है, वहीं भारतीय संस्कृति त्याग, सह-अस्तित्व और परोपकार के शाश्वत सिद्धांतों पर आधारित है, जो संपूर्ण मानवता के उत्थान का मार्ग प्रशस्त करती है।
मानवीय श्रेष्ठता और विवेक की व्याख्या करते हुए श्री आरावकर ने कहा कि सृष्टि जड़ और चेतन तत्वों के मेल से बनी है, जिसमें जीव-जंतु और कीट-पतंग प्रकृति के नियमों के अधीन जीवन जीते हैं, परंतु मनुष्य अपनी इच्छा शक्ति, विवेक और चिंतन क्षमता के कारण सर्वश्रेष्ठ है। उन्होंने सचेत किया कि मनुष्य अपनी बुद्धि से सृजन और समाज का संचालन तो करता है, लेकिन यदि उसका विवेक संस्कारों से संपृक्त न हो, तो यही शक्ति विनाशक सिद्ध होती है। भारतीय जीवन दर्शन में "सर्वे भवन्तु सुखिनः" और "वसुधैव कुटुम्बकम्" की भावना रची-बसी है, जो भोग के स्थान पर त्यागपूर्वक उपभोग की शिक्षा देती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संस्कारों की तपश्चर्या ही मनुष्य को "नर से नारायण" बनने की सामर्थ्य प्रदान करती है, जबकि संस्कारहीनता पतन का द्वार खोलती है। एक आदर्श नागरिक वही है जो राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक आधार से युक्त हो।
इस गरिमामय कार्यक्रम के विवरण साझा करते हुए वर्ग के सह प्रबंध प्रमुख डॉ. महेश शर्मा ने बताया कि सत्र का शुभारंभ संगीतमय वंदना के साथ हुआ। वर्ग पालक प्रो. भरतराम कुम्हार ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया, जबकि अतिथि परिचय विद्या भारती चित्तौड़ प्रांत निरीक्षक नवीन कुमार झा द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र संगठन मंत्री गोविंद कुमार, जोधपुर प्रांत सचिव गंगा विष्णु और जिला सचिव सतीश कुमार गौतम की गौरवमयी उपस्थिति रही। राष्ट्रभाव से ओतप्रोत 'वंदे मातरम्' के गायन के साथ इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण सत्र का समापन हुआ, जिसने उपस्थित प्रधानाचार्यों में नई ऊर्जा और वैचारिक स्पष्टता का संचार किया।

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