विद्या भारती प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग: राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका पर बल
कोटा के महावीर नगर में आयोजित 11 दिवसीय क्षेत्रीय नवीन प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग में मुख्य वक्ता गंगा विष्णु ने आचार्य के मर्यादित व्यवहार और नवाचार को जरूरी बताया।

कोटा के महावीर नगर तृतीय स्थित स्वामी विवेकानंद स्कूल में आयोजित विद्या भारती के प्रशिक्षण वर्ग के दौरान दीप प्रज्वलन और वंदना करते हुए पदाधिकारी।
शिक्षा केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं बल्कि राष्ट्र की नींव गढ़ने का पवित्र संकल्प है, जहाँ आचार्य की भूमिका एक व्यवसायी की नहीं अपितु राष्ट्र निर्माण के साधक की होती है। स्वामी विवेकानंद उच्च माध्यमिक विद्यालय, महावीर नगर तृतीय में आयोजित विद्या भारती के 11 दिवसीय क्षेत्रीय नवीन प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग के शुक्रवार के सत्र में मुख्य वक्ता जोधपुर प्रांत सचिव गंगा विष्णु ने उक्त विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर प्रशिक्षण वर्ग के पालक प्रोफेसर भारत राम कुम्हार की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
बौद्धिक सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता गंगा विष्णु ने कहा कि गोरखपुर के सरस्वती शिशु मंदिर से प्रारंभ हुई नवाचार की लघु यात्रा आज विद्या भारती रूपी विशाल वटवृक्ष के रूप में पुष्पित एवं पल्लवित हो चुकी है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि एक आचार्य का श्रेष्ठ संबोधन और मर्यादित व्यवहार कक्षा कक्ष में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होता है, जो सीधे विद्यार्थियों के अंतर्मन को स्पर्श करता है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार कक्षा 6 में उनके शिक्षक द्वारा दिए गए मार्गदर्शन ने उन्हें देश का महान वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा दी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक का व्यवहार ही बालकों के अधिगम का मूल आधार है और वही शिक्षक वास्तव में सफल है जो बालक की मनोवैज्ञानिक स्थिति को समझकर उसे निरंतर क्रियाशील बनाए रखे। डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन का संदर्भ देते हुए उन्होंने बताया कि उनके शिक्षक विष्णु केलकर के मार्गदर्शन ने ही उनके जीवन की दिशा को परिवर्तित कर दिया था। इस प्रशिक्षण वर्ग में विद्या भारती संस्थान के अखिल भारतीय संगठन मंत्री शिवप्रसाद, विद्या भारती राजस्थान के संगठन मंत्री गोविंद कुमार, चित्तौड़ प्रांत निरीक्षक नवीन कुमार झा, प्रेम सिंह शेखावत, क्षेत्र कोषाध्यक्ष डॉ. विमल कुमार जैन और प्रांत सह मंत्री सहित अनेक गणमान्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का भव्य समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम के उच्चारण के साथ हुआ, जिसने उपस्थित संभागियों में राष्ट्र सेवा का नया उत्साह भर दिया।

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