बारां/चित्तौड़गढ़। भारतीय शिक्षा दर्शन में मनुष्य के सर्वांगीण विकास का आधार शरीर, प्राण, मन, बुद्धि और आत्मिक आनंद का संतुलन है। पंचकोशात्मक विकास की यही भारतीय संकल्पना श्रेष्ठ मनुष्य के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती है। विद्या भारती चित्तौड़ प्रांत के प्रशिक्षण प्रमुख महेंद्र सिंह सिसोदिया ने चित्तौड़गढ़ स्थित प्रांत प्रशिक्षण केंद्र में चल रहे सप्त दिवसीय प्रशिक्षु प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग के तृतीय दिवस पर यह विचार व्यक्त किए।

सिसोदिया ने कहा कि पाश्चात्य चिंतन मुख्यतः व्यक्तित्व विकास पर केंद्रित रहता है, जबकि भारतीय शिक्षा दर्शन मनुष्य के सर्वांगीण विकास की समग्र दृष्टि प्रस्तुत करता है। अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय इन पांचों कोशों का संतुलित विकास ही मनुष्य के पूर्ण व्यक्तित्व का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वांगीण विकास के माध्यम से ही समग्र विकास की संकल्पना को साकार किया जा सकता है।

पंचकोश की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए सिसोदिया ने बताया कि अन्नमय कोश शरीर के पोषण एवं स्वास्थ्य, प्राणमय कोश जीवन-ऊर्जा एवं क्रियाशीलता, मनोमय कोश भाव एवं मन के संतुलन, विज्ञानमय कोश विवेक एवं बुद्धि तथा आनंदमय कोश आंतरिक प्रसन्नता एवं आत्मिक उत्कर्ष से संबंधित है। इन पांचों आयामों का संतुलित विकास व्यक्ति के व्यक्तित्व को पूर्णता प्रदान करता है।

प्रशिक्षण वर्ग के विभिन्न सत्रों में प्रधानाचार्य के व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व क्षमता, भारतीय शिक्षा दृष्टि, विद्यालय प्रबंधन, कार्यालयीन व्यवस्था तथा शैक्षिक एवं सांस्कृतिक दायित्वों से संबंधित विषयों पर प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इन सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षु प्रधानाचार्यों को उनके दायित्वों और कार्यक्षमता से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जा रही है।

बारां जिला सचिव राजेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण वर्ग में प्रांत सचिव मानेंगे पटेल, झालावाड़ जिला सचिव मुकुट बिहारी यादव, संगीत प्रमुख ममता सोनी और ललित बारोतिया सहित प्रशिक्षण वर्ग से जुड़े पदाधिकारी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।

वर्ग संयोजक ललित दवे ने बताया कि सत्र के दौरान प्रशिक्षण टोली के सदस्य नरेंद्र चास्टा का जन्मदिवस भी भारतीय परंपरा के अनुरूप आत्मीय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर उनके स्वस्थ, यशस्वी एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की गई।

प्रशिक्षण वर्ग में बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, अजमेर, बूंदी, कोटा एवं बारां जिलों के प्रशिक्षु प्रधानाचार्य सहभागिता कर रहे हैं। प्रशिक्षण में पंचकोशीय विकास की भारतीय अवधारणा के साथ प्रधानाचार्यों के व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व क्षमता और विद्यालय संचालन से जुड़े विषयों पर विशेष मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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