राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में परिलक्षित है विद्या भारती की शिक्षा दृष्टि
छबड़ा में आयोजित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में प्रांत निरीक्षक नवीन कुमार झा ने विद्या भारती के गौरवशाली इतिहास और शिक्षा दर्शन पर प्रकाश डाला।

आदर्श विद्या मंदिर, छबड़ा में आयोजित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के दौरान प्रांत निरीक्षक नवीन कुमार झा अपना बौद्धिक उद्बोधन देते हुए।
विद्या भारती द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर, छबड़ा में आयोजित दस दिवसीय नव चयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के द्वितीय दिवस पर विद्या भारती के गौरवशाली इतिहास, राष्ट्रीय स्वरूप एवं शिक्षा दर्शन को रेखांकित करते हुए प्रांत निरीक्षक नवीन कुमार झा ने कहा कि वर्तमान की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्या भारती की शिक्षा दृष्टि स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। उन्होंने कहा कि भारत को परम वैभव संपन्न राष्ट्र बनाने के महान लक्ष्य को लेकर वर्ष 1952 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में विद्या भारती के प्रथम सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित स्वयंसेवकों द्वारा की गई थी। इस दिव्य शैक्षिक यज्ञ को धरातल पर उतारने और इसे वटवृक्ष बनाने में कृष्णकांत, लज्जाराम तोमर, दीनानाथ बत्रा एवं कृष्णचंद्र गांधी जैसे अनेक समर्पित कार्यकर्ताओं ने अपना संपूर्ण जीवन अर्पित किया।
प्रांत निरीक्षक झा ने संगठन के व्यापक विस्तार की जानकारी देते हुए बताया कि विद्या भारती आज अखिल भारतीय स्तर पर एक विशाल एवं प्रभावशाली शैक्षिक संगठन के रूप में स्थापित हो चुकी है। वर्तमान में संपूर्ण देश को 11 क्षेत्रों एवं 52 प्रांतों में विभाजित कर संगठनात्मक कार्य संचालित किए जा रहे हैं। देश के लगभग 680 जिलों में 22,242 विद्यालयों के माध्यम से 35 लाख 86 हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जबकि 1 लाख 63 हजार से अधिक आचार्य एवं दीदी मां शारदे की सेवा में समर्पित हैं। शैक्षिक यात्रा को उच्चतर स्तर पर ले जाते हुए संगठन द्वारा 59 महाविद्यालय एवं 4 विश्वविद्यालयों का भी संचालन किया जा रहा है।
विद्या भारती की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि संगठन केवल विद्यालय संचालन तक ही सीमित नहीं है, अपितु समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका का निर्वहन कर रहा है। जनजातीय एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष शैक्षिक कार्य करने के साथ-साथ संगठन की विद्वत परिषद, शोध कार्य, संस्कृति बोध परियोजना एवं पूर्व छात्र आयाम अत्यंत प्रभावी रूप से कार्यरत हैं। विशेषकर, पूर्व छात्र आयाम के अंतर्गत लगभग 10 लाख पंजीकृत पूर्व छात्र जुड़े हुए हैं, जो इसे विश्व के सबसे बड़े पूर्व छात्र समूहों में से एक बनाते हैं। सत्र के दौरान जिला सचिव राजेंद्र कुमार शर्मा मंचासीन रहे। कार्यक्रम का समापन संगीतमय वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। यह प्रशिक्षण वर्ग विद्या भारती की वैचारिक प्रतिबद्धता और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका को नए आचार्यों के समक्ष स्पष्ट करने में मील का पत्थर सिद्ध हो रहा है।

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