वंदे मातरम् केवल गान नहीं, राष्ट्र का प्राण : विद्वत परिषद की बैठक में बनी 150वें वर्ष की योजना
बारां में विद्वत परिषद की चिंतन बैठक में वंदे मातरम् के 150वें वर्ष की योजना बनी, 25 सितंबर को शिक्षण संस्थानों में सामूहिक आयोजन होगा।

तस्वीर में केशव कीर्ति भवन, बारां में आयोजित विद्वत परिषद की जिला स्तरीय चिंतन बैठक के दौरान वक्ता और उपस्थित सदस्य नजर आ रहे हैं।
बारां में विद्वत परिषद की जिला स्तरीय चिंतन बैठक केशव कीर्ति भवन में आयोजित हुई, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, भारतीय जीवन-मूल्य आधारित शिक्षा और वंदे मातरम् के 150वें स्मरण वर्ष को लेकर महत्वपूर्ण योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज परिवर्तन तथा समसामयिक विषयों के तथ्य एवं सत्य को सकारात्मक विमर्श के साथ समाज के बीच रखने सहित विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा हुई।
विद्या भारती के जिला सचिव राजेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि बैठक का शुभारंभ जिला संयोजक सरोज दीक्षित, सहसंयोजक शिक्षाविद् डॉ. सुधीरा एवं श्रीमती रेखा सक्सेना ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गान नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना और प्राण है।
वंदे मातरम् के 150वें स्मरण वर्ष के अवसर पर जिले में व्याख्यान, संगोष्ठी एवं परिसंवाद आयोजित करने की योजना पर चर्चा की गई। इसी क्रम में आगामी 25 सितंबर को प्रातः 11 बजे जिले के सभी शिक्षण संस्थानों में विद्वत परिषद के माध्यम से वंदे मातरम् का सामूहिक आयोजन करने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय चेतना एवं राष्ट्रभाव के विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है।
बैठक में राष्ट्रीय कवि जगदीश सोनी ‘जलजला’, शिक्षाविद् शिवराज सिंह हाड़ा, नरेंद्र राठौड़, आत्मकल्याण सुमन, शंभूदयाल वैष्णव एवं साहित्यकार कौशल तिवारी ने अपने विचार व्यक्त किए।
समिति के वरिष्ठ सदस्य एवं सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी प्रहलाद राठौर ने आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। बैठक का संचालन स्वामी विवेकानंद विद्या निकेतन की वरिष्ठ आचार्या हेमलता नागर ने किया। सामूहिक राष्ट्रगान के साथ बैठक का समापन हुआ।

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