अटरू में गूँजे वैदिक मंत्र: विद्या भारती के विद्यारंभ संस्कार से नन्हे कदमों ने धरा शिक्षा की दहलीज पर कदम
बारां के अटरू में बसंत पंचमी एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर आदर्श विद्या मंदिर में भव्य विद्यारंभ संस्कार का आयोजन हुआ। पंडित भुपेन्द्र गौत्तम के वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-यज्ञ के बीच 11 नव-प्रवेशित बच्चों ने अक्षर लेखन कर शिक्षा के सफर का आरंभ किया। भारतीय संस्कृति और संस्कारों से सराबोर इस गौरवशाली समाचार की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

अटरू (बारां)। मंत्रोच्चार की मंगल ध्वनि, आहुतियों की सुगंध और माँ शारदे की वंदना के बीच बारां जिले के अटरू कस्बे में भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा जीवंत हो उठी। विद्या भारती शिक्षा संस्थान द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर में बसंत पंचमी और 'आजाद हिंद फौज' के प्रणेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के पावन संगम पर 'विद्यारंभ संस्कार' का एक भव्य एवं दिव्य आयोजन किया गया। यह केवल एक प्रवेश प्रक्रिया नहीं, बल्कि आधुनिक शिक्षा और पुरातन संस्कारों के मेल का एक ऐसा उत्सव था जिसने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
समारोह का आगाज माँ सरस्वती की आकर्षक झांकी के समक्ष दीप प्रज्वलन और वैदिक ऋचाओं के साथ हुआ। प्रसिद्ध कथावाचक पंडित भुपेन्द्र गौत्तम के सान्निध्य में आयोजित हवन-यज्ञ ने वातावरण में शुचिता का संचार किया। इस पावन बेला में विद्यालय में नव-प्रवेशित 11 भैया-बहिनों का विधिवत विद्यारंभ संस्कार संपन्न कराया गया। उन मासूम हाथों ने जब पहली बार अक्षरों को कागज़ पर उकेरा, तो लगा मानो ज्ञान का सूर्य उदय हो रहा हो। प्रधानाचार्य सत्यनारायण पांचाल ने इन नन्हे नौनिहालों का तिलक लगाकर अभिनंदन किया और पूरी श्रद्धा के साथ पाठी पूजन की रस्म पूरी करवाई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आदर्श विद्या मंदिर माध्यमिक विद्यालय छबड़ा के अध्यक्ष अशोक कुमार भार्गव ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए शिक्षा के आध्यात्मिक पक्ष को रेखांकित किया। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अदम्य साहस को याद करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति के 16 संस्कारों में विद्यारंभ संस्कार का स्थान सर्वोच्च है, क्योंकि यही बालक के चरित्र और ज्ञान की नींव रखता है। कार्यक्रम की कमान संभाल रहे प्रमुख जितेन्द्र सिंह ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें शिक्षा, संस्कार और राष्ट्रवाद का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस गरिमामयी अवसर पर समाज के प्रबुद्ध नागरिक और अभिभावक बड़ी संख्या में साक्षी बने। कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने में आचार्य और दीदी वर्ग से लवकुश तिवारी, द्विव्या सुमन, सीमा मेघवाल, कोमल पारिक, कुमकुम जांगिड़, मोनू शर्मा, विवती सरकार, नेहा नागर एवं लक्ष्मी नागर ने अपना सराहनीय योगदान दिया। अंत में, आदर्श विद्या मंदिर समिति के अध्यक्ष अतुल पारिक ने आगंतुकों का आभार प्रकट किया। महाआरती और प्रसाद वितरण के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन अटरू के शैक्षिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो बताता है कि संस्कारयुक्त शिक्षा ही एक श्रेष्ठ समाज का आधार है।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
