बारां में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सेमिनार में राष्ट्रचेतना, स्वतंत्रता संग्राम और विभाजन की मानवीय पीड़ा पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। समाजसेवी एवं इंटेक एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन विष्णु कुमार साबू ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता क्रांति का प्राणतत्व और राष्ट्रीय अस्मिता का संवाहक है।

कला, साहित्य, संस्कृति और पुरातत्व विभाग बारां तथा भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) वराह नगरी बारां अध्याय के संयुक्त तत्वावधान में राजकीय संग्रहालय सभागार में सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “वंदे मातरम् : राष्ट्रचेतना के 150 वर्ष” एवं “विभाजन की विभीषिका : इतिहास, स्मृति और मानवीय पीड़ा” रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पूजा-अर्चना के साथ हुआ। समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय गीत के ओजस्वी गायन से हुई। इसके पश्चात साहित्यकार भैरूलाल भास्कर और साहित्यकार बच्छराज राजस्थानी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

मुख्य अतिथि समाजसेवी एवं इंटेक एडवाइजरी कमेटी के चेयरमैन विष्णु कुमार साबू ने कहा, “‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता क्रांति का प्राणतत्व और हमारी राष्ट्रीय अस्मिता का संवाहक है। 150 वर्षों से यह गीत हर भारतीय के हृदय में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करता आ रहा है। आज की युवा पीढ़ी को इस ऐतिहासिक चेतना से जोड़ना और देश की सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण्ण रखना हम सभी का परम दायित्व है।”

मुख्य वक्ता के रूप में स्वतंत्र पत्रकार कमलेश चौरसिया ने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’ मंत्र ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश में अभूतपूर्व राष्ट्रभक्ति का संचार किया। उन्होंने कहा कि देश के विभाजन की विभीषिका इतिहास का वह काला अध्याय है, जिसकी मानवीय पीड़ा और विस्थापन के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

विशिष्ट अतिथि दिलीप शाह ‘मधुप’ ने राष्ट्रीय भावना पर केंद्रित उद्बोधन में कहा कि पत्रकारिता और साहित्य का हमेशा से राष्ट्रनिर्माण में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

सेमिनार के अन्य विशिष्ट अतिथि कला-साहित्य-संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग कोटा के संभागीय अधीक्षक हेमेन्द्र कुमार अवस्थी ने कहा कि विभाग का निरंतर प्रयास है कि हमारी ऐतिहासिक धरोहरों, राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजकर भावी पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए।

अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए इंटैक एडवाइजरी कमेटी के वरिष्ठ सदस्य ओम प्रकाश शर्मा ने कहा कि राष्ट्रचेतना और विभाजन की विभीषिका दोनों ही विषय हमें अपनी जड़ों, त्याग और बलिदान का स्मरण कराते हैं।

इंटेक लेडी विंग चेयरमैन नीता शर्मा ने विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहने चाहिए, इससे समाज में राष्ट्रभक्ति की भावना सतत रूप से विकसित होती रहे।

इंटेक के कन्वीनर जितेंद्र शर्मा पम्मी ने भी अपने सारगर्भित उद्बोधन में वंदे मातरम् और विभाजन विभीषिका पर विस्तृत प्रकाश डाला। सेमिनार में राष्ट्रगीत की ऐतिहासिक भूमिका, राष्ट्रचेतना तथा विभाजन की मानवीय पीड़ा से जुड़े विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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