बारां। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर बारां जिले में पर्यावरण और जल संरक्षण की अलख जगाने के लिए 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के तहत विविध और व्यापक गतिविधियों का शंखनाद किया गया है। प्रकृति और जल स्रोतों को सहेजने के इस महाभियान के अंतर्गत गुरुवार को जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन 2.1 व 2.2 के पूर्ण हो चुके कार्यों का बारीकी से अवलोकन करने के साथ ही उनका भव्य लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.2 व 2.3 के अंतर्गत नए विकास कार्यों की महती स्वीकृति जारी कर उन्हें धरातल पर प्रारंभ किया गया। ग्रामीण परिवेश को हरा-भरा बनाने के लिए औरण व चारागाह भूमि का चिन्हीकरण, व्यापक स्तर पर पौधारोपण व घास बुआई की ठोस तैयारियां तथा उन्नत बीज बैंक गतिविधियों को गति दी गई, वहीं 'हरियालो राजस्थान' के तहत आगामी पौधारोपण की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन 2.0 के लिए चयनित ग्रामों के ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर जीवंत 'जल चौपाल' का आयोजन हुआ, जिसमें ग्रामीणों को जल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।

इस महाअभियान में विभिन्न सरकारी महकमों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है। सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा सरकारी भवनों में स्थापित रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम (आरटीडब्ल्यूएचएस) की सघन सफाई की गई और सड़क किनारे (रोड साइड) पौधारोपण के लिए अग्रिम तैयारियां पूरी की गईं। दूसरी ओर, खेल विभाग, नेहरू युवा केन्द्र, स्वयंसेवी संस्थाओं, शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में जन-जागृति का व्यापक संचार किया गया। नई पीढ़ी और आमजन को जल एवं पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए निबंध लेखन, नारा लेखन, चित्रकला, खेलकूद प्रतियोगिताएं और नुक्कड़ नाटकों जैसे प्रभावी सांस्कृतिक व बौद्धिक कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया।

विश्व पर्यावरण दिवस के मुख्य अवसर पर शुक्रवार को वन विभाग द्वारा 'हरियालो राजस्थान' को साकार करने के लिए कई अग्रिम व महत्वपूर्ण कार्य युद्ध स्तर पर किए जाएंगे। इसके तहत वृक्षारोपण के लिए गड्ढे खोदने, सीसीटी और एसजीटी कार्यों को प्रारंभ करने की कार्ययोजना बनाई गई है। वन क्षेत्रों में स्थित पारंपरिक जल संग्रहण संरचनाओं की गाद (कीचड़) निकालने का काम हाथ में लिया जाएगा, साथ ही विभागीय योजनाओं के तहत निर्मित एवं पूर्ण हो चुकी जल संग्रहण संरचनाओं का प्रामाणिक अवलोकन और लोकार्पण संपन्न होगा। पर्यावरण और स्वास्थ्य के प्रतीक तुलसी के पौधों का निःशुल्क वितरण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान-2.1 एवं 2.2 के अंतर्गत पूर्ण कार्यों का अवलोकन व लोकार्पण तथा अभियान के चरण 2.2 एवं 2.3 के तहत नवीन कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति जारी कर उन्हें धरातल पर शुरू किया जाएगा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) और वीबी जी राम जी योजना के अंतर्गत विकास कार्यों की शुरुआत करने के साथ-साथ सभी विभागीय नर्सरियों में विशेष स्वच्छता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इन नर्सरियों का सघन अवलोकन कर पौधों की ग्रेडिंग की जाएगी और चयनित विशिष्ट स्थानों पर प्रकृति को समर्पित 'ईको फ्रेंडली आर्ट' तैयार की जाएगी।

सरकारी और वैधानिक स्तर पर पर्यावरण को सुरक्षित करने के लिए राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जिले के नदी-नालों में बहने वाले अपशिष्ट पानी को परिष्कृत (साफ) करने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) संयंत्रों की वास्तविक आवश्यकता एवं उपलब्धता का गहन आंकलन किया जाएगा। जिले में वर्तमान में स्थापित एसटीपी और सीईटीपी से प्राप्त होने वाले परिष्कृत जल की मात्रा का सटीक आंकलन कर इसके पुनरुपयोग के लिए महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्राप्त किए जाएंगे। स्थानीय नदियों, तालाबों एवं झीलों को प्रदूषण मुक्त बनाने और उनकी सफाई के लिए एक व्यापक जन-जागृति अभियान चलाया जाएगा। इसी क्रम में स्वायत्त शासन विभाग द्वारा आमजन से सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद करने की अपील करते हुए जन-जागृति अभियान चलाया जाएगा और प्लास्टिक का उपयोग कम करने के लिए सामूहिक शपथ कार्यक्रम आयोजित होगा।

इस वृहद और दूरगामी अभियान का भव्य जिला स्तरीय समापन समारोह जिला प्रशासन, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा। इस समापन समारोह में वंदे गंगा अभियान को संबल देने वाले तथा जल संरक्षण एवं जन भागीदारी के क्षेत्र में उत्कृष्ट, अनुकरणीय और अद्वितीय कार्य करने वाले भामाशाहों, स्वयंसेवी संस्थाओं, ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, गैर सरकारी संस्थाओं (एनजीओ), अग्रिम पंक्ति के जल-योद्धाओं, पथ-प्रदर्शकों और जल उपयोगिता संगमों की गरिमामयी पहचान की जाएगी। जल संरक्षण के प्रति उनके इस अनथक समर्पण और उत्कृष्ट नागरिक योगदान के लिए उन्हें जिला स्तर पर प्रतिष्ठित 'जल गौरव सम्मान' से अलंकृत किया जाएगा, जो जिले में भविष्य के जल आंदोलनों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

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