अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन: श्मशान के वस्त्रों की पुन: बिक्री पर चिंता
संगठन ने शवों के अंतिम वस्त्रों और बर्तनों के बाजार में दोबारा बिकने को परंपरा के विरुद्ध बताते हुए शोक संतप्त परिवारों से इन्हें नष्ट करने की अपील की।

अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन ने श्मशान घाटों में शवों पर चढ़ाए जाने वाले अंतिम वस्त्रों और अंतिम संस्कार में उपयोग किए गए बर्तनों के दोबारा बाजारों में पहुंचकर बिकने के मामलों पर गहरी चिंता जताई है। संगठन ने इसे धार्मिक आस्था, सामाजिक परम्पराओं और मानवीय संवेदनाओं के साथ खुला खिलवाड़ बताया है।
बारां में जारी संयुक्त विज्ञप्ति में महासम्मेलन के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष ललितमोहन खण्डेलवाल, जिलाध्यक्ष कमलेश विजय, महामंत्री सुरेश गोयल, महिला अध्यक्ष नीतू गुप्ता, महामंत्री शिल्पा ठाकुरिया, युवा अध्यक्ष भानू कुमार पोरवाल, महामंत्री आनन्द कुमार बंसल, मनोज विजय, अशोक बंसल, नरेश खंडेलवाल, देवकीनंदन बंसल, विमल बंसल और भारत जैन सहित वैश्य समाज के घटक अग्रवाल, खंडेलवाल, पोरवाल, विजयवर्गीय, माहेश्वरी और ओसवाल समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्व में परम्परा के अनुसार श्मशान में शवों से उतारे गए वस्त्रों को वहीं फाड़कर अथवा नष्ट कर दिया जाता था, ताकि उनका अन्य कार्यों में दोबारा उपयोग नहीं हो सके।
विज्ञप्ति में कहा गया कि वर्तमान समय में कई स्थानों पर शवों पर चढ़ाई जाने वाली शॉल, चुनड़ी, साड़ी, पगड़ी, पेंट-शर्ट सहित अन्य वस्त्रों को बिना नष्ट किए ही श्मशान में छोड़ दिया जाता है। इसी प्रकार अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाले नए बर्तन भी वहीं फेंक दिए जाते हैं। बाद में कुछ लोग इन वस्त्रों और बर्तनों को एकत्र कर औने-पौने दामों में बाजार में बेच देते हैं।
महासम्मेलन ने आशंका जताई कि यही वस्त्र और बर्तन बाद में कुछ व्यापारियों द्वारा अधिक आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के लिए पुनः विक्रय कर दिए जाते हैं। संगठन ने इसे धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक परम्पराओं के विपरीत बताते हुए अत्यंत गंभीर और संवेदनशील विषय करार दिया है।
पदाधिकारियों ने शोक संतप्त परिवारों से आग्रह किया कि अंतिम संस्कार में उपयोग किए गए वस्त्रों और बर्तनों को श्मशान में ही नष्ट कर दें, ताकि उनका दोबारा व्यापारिक उपयोग नहीं हो सके। साथ ही व्यापारियों से भी अपील की गई कि केवल लाभ कमाने के उद्देश्य से ऐसे सामान की खरीद-फरोख्त से दूर रहें।
महासम्मेलन ने कहा कि शवों से जुड़े वस्त्रों और सामग्री का पुनः उपयोग भारतीय धार्मिक परम्पराओं, सामाजिक मर्यादाओं और मानवीय संवेदनाओं के विरुद्ध है। संगठन ने समाज से इस विषय पर गंभीरता से विचार करने और जागरूक रहने की अपील की है।

Pratahkal Bureau
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