बारां। राजस्थान के बारां जिले में महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनकर उभरा 'अमृत महोत्सव 2026' अपने उद्घाटन सत्र में ही प्रशासनिक संवेदनहीनता और कुप्रबंधन की भेंट चढ़ गया। जिला प्रशासन द्वारा जिस आयोजन का ढिंढोरा हफ्तों से पीटा जा रहा था, उसकी शुरुआत ही अव्यवस्था के ऐसे मंजर से हुई जिसने दावों और हकीकत के बीच की खाई को उजागर कर दिया। धान मंडी प्रांगण में आयोजित राजसखी मेले के उद्घाटन कार्यक्रम में न केवल समय की गरिमा तार-तार हुई, बल्कि सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए बुलाए गए मासूम बच्चों को घंटों भूखा-प्यासा रखकर उनके उत्साह को प्रशासनिक उपेक्षा की आग में झोंक दिया गया।

आयोजन की रूपरेखा के अनुसार कार्यक्रम का समय शाम 7:15 बजे निर्धारित किया गया था, लेकिन विडंबना यह रही कि मुख्य अतिथि डॉ. मंजू बाघमार, राज्यमंत्री महिला एवं बाल विकास विभाग, अपने तय समय से करीब दो घंटे की देरी से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं। मुख्य अतिथि के न आने के कारण अन्य विशिष्ट अतिथि भी नदारद रहे, जिसका सीधा असर आयोजन की भव्यता पर पड़ा। देरी और बढ़ती ठंड के बीच आमजन का धैर्य जवाब दे गया और देखते ही देखते पांडाल की आधी से ज्यादा कुर्सियाँ खाली हो गईं। जो उत्सव जन-भागीदारी का केंद्र बनना था, वह उद्घाटन के दिन ही फीका नजर आया।

सबसे हृदयविदारक स्थिति उन स्कूली बच्चों और शिक्षकों की रही, जिन्हें सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रदर्शन के लिए शाम 4 बजे ही आयोजन स्थल पर बुला लिया गया था। प्रशासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब इन बच्चों के लिए न तो पीने के पानी की व्यवस्था की गई और न ही जलपान का कोई प्रबंध हुआ। मीडिया से मुखातिब होते हुए एक बालिका का दर्द छलक पड़ा, जिसने बताया कि वह और उसके साथी पिछले चार घंटों से बिना कुछ खाए-पिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। रात 9 बजे तक चले इस इंतजार ने प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

जिला प्रशासन का यह महत्वाकांक्षी आयोजन 21 जनवरी से शुरू होकर आगामी 10 अप्रैल तक चलना है, लेकिन पहले ही दिन की बदइंतजामी ने आने वाले दिनों की तैयारियों की पोल खोल दी है। महिला सशक्तिकरण का संदेश देने वाले मंच पर बच्चों की यह दुर्गति और समय का अनुशासन न होना, इस महोत्सव के मूल उद्देश्यों को धूमिल कर रहा है। अब क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि क्या बड़े स्तर पर किए जाने वाले आयोजनों में केवल प्रचार ही प्राथमिकता है या धरातल पर मानवीय गरिमा और व्यवस्था का भी कोई स्थान है। अमृत महोत्सव के नाम पर शुरू हुआ यह सफर अपने पहले ही पड़ाव पर एक कड़वा अनुभव छोड़ गया है।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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