बारां में बरसे भक्ति के रंग: राष्ट्रीय संत गोविंददेव गिरी ने कहा—परमात्मा का अंतिम स्वरूप केवल आनंद है
बारां में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन राष्ट्रीय संत गोविंददेव गिरी महाराज ने परमात्मा के वास्तविक स्वरूप 'आनंद' की व्याख्या की। साबू परिवार द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में शीतलहर के बीच हजारों श्रद्धालु भक्तिरस में डूबे रहे। जानिए कैसे महर्षि व्यास ने समाधि में साक्षात कृष्ण लीला देख भागवत की रचना की।

बारां। कड़ाके की ठंड और शीतलहर की परवाह किए बिना जब आस्था का सैलाब उमड़ता है, तो वातावरण स्वयं भक्तिमय हो उठता है। राजस्थान के बारां जिले में एनएच 27 बायपास स्थित होटल द्वारिका के परिसर में इन दिनों कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिल रहा है। अवसर है स्व. मुरलीधर साबू मेमोरियल ट्रस्ट एवं विष्णु साबू परिवार के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का, जहाँ कथा के दूसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं ने भक्तिरस की गंगा में डुबकी लगाई। व्यास पीठ से अमृत वर्षा करते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास अयोध्या के कोषाध्यक्ष एवं सुविख्यात राष्ट्रीय संत स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने जीवन के गूढ़ रहस्यों को सुलझाते हुए स्पष्ट किया कि इस संपूर्ण चराचर जगत में जिस किसी ने भी परमात्मा का साक्षात्कार किया है, उन सबके अनुभव का निचोड़ यही है कि आनंद ही परमात्मा का अंतिम और वास्तविक स्वरूप है।
महाराजश्री ने विज्ञान और अध्यात्म के बीच की सूक्ष्म रेखा को आधुनिक परिभाषा में पिरोते हुए कहा कि जहाँ विज्ञान निरीक्षण, गणना और प्रयोग के आधार पर चलता है, वहीं अध्यात्म का आधार 'ध्यान' यानी मेडिटेशन है। उन्होंने श्रीमद् भागवत महापुराण की प्रामाणिकता पर बल देते हुए इसे एक ऐसा अलौकिक ग्रंथ बताया जो महर्षि व्यास द्वारा समाधि की अवस्था में साक्षात कृष्ण की लीलाओं को देखकर रचा गया है। संत गोविंददेव गिरी ने बड़े ही रोचक ढंग से समझाया कि आज की तकनीकी भाषा में कहें तो श्रीमद् भागवत सीधा ईश्वर के लोक से 'डाउनलोड' किया हुआ ज्ञान है, जिसमें त्रुटि की कोई गुंजाइश नहीं है। कथा के दौरान जब देवर्षि नारद और महर्षि व्यास के मध्य हुए मार्मिक संवाद का वर्णन किया गया, तो पांडाल में उपस्थित हर श्रद्धालु भावविभोर हो उठा। उन्होंने बताया कि प्रभु ने नारद जी से स्पष्ट कहा था कि जिसके भीतर सूक्ष्म भी अशुद्धि या दोष शेष है, उसे परमात्मा की प्राप्ति संभव नहीं है।
कथा के प्रवाह के बीच जब 'राधे-राधे गोविंद बोलो रे...' जैसे भजनों की गूँज उठी, तो पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर भजनों पर झूमने लगे और महाराजश्री की दिव्य वाणी ने भीषण सर्दी के बावजूद माहौल में एक आध्यात्मिक ऊष्मा भर दी। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य यजमान विष्णु साबू एवं साबू परिवार के सदस्यों ने व्यास पीठ का विधि-विधान से पूजन कर महाराजश्री का आशीर्वाद लिया। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए आयोजक परिवार द्वारा निःशुल्क बसों की व्यवस्था की गई है, जिससे हजारों की संख्या में महिला-पुरुष इस ज्ञान यज्ञ का लाभ उठा रहे हैं। विष्णु साबू ने जानकारी दी कि यह कथा आगामी 11 जनवरी तक अनवरत चलेगी, जिसमें प्रतिदिन दोपहर 1.30 बजे से शाम 5 बजे तक कथा का समय निर्धारित है, जबकि रविवार को विशेष सत्र सुबह 9.30 बजे से प्रारंभ होगा।

Pratahkal Bureau
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