राजस्थान की वीर धरा और विशेषकर बारां जिले के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज 'हिंदू हृदय सम्राट' अमर सनातनी दादा मोतीलाल बंकट की विरासत एक बार फिर जन-जन के मानस पटल पर जीवंत होने जा रही है। अपनी वीरता और अटूट हिंदुत्व की भावना से देश-प्रदेश में सनातन धर्म की पताका फहराने वाले दादा बंकट की 106वीं जयंती इस वर्ष एक ऐतिहासिक स्वरूप लेने जा रही है। आगामी 13 फरवरी को बारां शहर एक ऐसे भव्य उत्सव का साक्षी बनेगा, जो न केवल श्रद्धा का प्रतीक होगा, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए दादा बंकट के शौर्यपूर्ण विचारों का संवाहक भी बनेगा। इस पावन अवसर पर दादा की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा, जिसकी तैयारियों ने जिले भर में उत्साह का संचार कर दिया है।

बंकट व्यायामशाला के अध्यक्ष भुवनेश सोनी और संरक्षक ओम प्रकाश शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित होने वाले इस गरिमामयी समारोह की रूपरेखा तय कर ली गई है। व्यायामशाला के पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि इस बार दादा बंकट के विचार घर-घर तक पहुँचाए जाएंगे, ताकि उनका संघर्ष और आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणापुंज बना रहे। इस महायज्ञ को सफल बनाने हेतु प्रशांत विजयवर्गीय को संयोजक और विकास अदलखा को सहसंयोजक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। पदभार ग्रहण करते ही दोनों पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रतिमा अनावरण का यह कार्यक्रम न केवल बारां बल्कि संपूर्ण क्षेत्र के लिए गौरव का विषय होगा।

समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए मुख्य अतिथि के रूप में बूंदी के महाराव वंशवर्धन हाडा और कई दिव्य संतों का सान्निध्य प्राप्त होगा। आयोजन समिति के अनुसार, इस समारोह में बारां शहर के समस्त व्यापार मंडल, सामाजिक संगठन और सभी अखाड़ों की सक्रिय सहभागिता रहेगी। आयोजन को लेकर आयोजित विशेष बैठक में संरक्षक ओम प्रकाश शर्मा, उस्ताद कस्तूरचंद सुमन, और सूरजमल उस्ताद जैसे वरिष्ठों का मार्गदर्शन मिला। साथ ही अध्यक्ष भुवनेश सोनी, महामंत्री राजेंद्र गहलोत, योगेश शर्मा, और संरक्षक समिति के जगदीश शर्मा, चंदन महाराज, किशन पांचाल, रितेश शर्मा, जयेश गालव, जितेंद्र सुमन तथा संजय गुर्जर सहित कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

यह भव्य आयोजन बारां की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकजुटता को प्रदर्शित करेगा। शहर के चप्पे-चप्पे में दादा बंकट के जयघोष की गूँज सुनाई देने लगी है। यह समारोह केवल एक प्रतिमा का अनावरण नहीं है, बल्कि उस सनातन चेतना का पुनर्जागरण है जिसे दादा बंकट ने जीवनभर सींचा था। सभी संगठनों और अखाड़ों की सामूहिक उपस्थिति इस आयोजन को एक जन-आंदोलन का रूप दे रही है, जो बारां के गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने के लिए तैयार है।

Pratahkal Bureau

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