बारां में गूंजा बाल विवाह मुक्त भारत का शंखनाद: राजसखी मेले में नुक्कड़ नाटक के जरिए बेटियों के भविष्य को बचाने की मार्मिक अपील
बारां के राजसखी मेले में अमृत महोत्सव के तहत सृष्टि सेवा समिति और बाल अधिकारिता विभाग ने '100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान का आयोजन किया। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर नृत्य नाटक के जरिए बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता फैलाई गई और लोगों को शपथ दिलाई गई। लोकेश सेन, विजय कुशवाह और श्वेता अदलक्खा सहित कई दिग्गजों की मौजूदगी में सामाजिक कुरीतियों को मिटाने का संकल्प लिया गया।

बारां। राजस्थान के बारां जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति की जड़ों पर प्रहार करने के लिए एक सशक्त शंखनाद किया गया है। आजादी के अमृत महोत्सव के पावन अवसर पर, शहर के धान मंडी प्रांगण में आयोजित 'राजसखी मेले' के बीच सृष्टि सेवा समिति और महिला एवं बाल अधिकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक भावुक और प्रेरणादायी कार्यक्रम संपन्न हुआ। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की गरिमा को आत्मसात करते हुए '100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल दर्शकों का ध्यान खींचा, बल्कि समाज की चेतना को भी झकझोर कर रख दिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सृष्टि सेवा समिति के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया एक हृदयस्पर्शी नृत्य नाटक रहा। इस नाटक के माध्यम से कलाकारों ने कच्ची उम्र में विवाह के बंधनों में जकड़ी गई बेटियों की पीड़ा और उनके सपनों के टूटने के दर्द को इतनी जीवंतता से पिरोया कि वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। यह मात्र एक मंचन नहीं था, बल्कि उन रूढ़ियों के खिलाफ एक खुली चुनौती थी जो आज भी समाज के विकास की राह में रोड़ा बनी हुई हैं। नाटक के जरिए यह संदेश स्पष्ट रूप से प्रसारित किया गया कि शिक्षा और अधिकार ही बालिकाओं के सच्चे गहने हैं।
जागरूकता के इस महाकुंभ में केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान ही नहीं हुआ, बल्कि एक सामूहिक संकल्प की गूंज भी सुनाई दी। मेले में उमड़े जनसैलाब, विशेषकर महिलाओं और पुरुषों को एक स्वर में बाल विवाह मुक्त भारत बनाने की शपथ दिलाई गई। समिति के सदस्यों ने आमजन को बाल विवाह के कानूनी दुष्परिणामों और बच्चों के स्वास्थ्य व मानसिक विकास पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान यह स्पष्ट किया गया कि बाल विवाह न केवल एक सामाजिक बुराई है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है, जिसके खिलाफ समाज के हर नागरिक को पहरेदार बनना होगा।
इस गरिमामय आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने में कई महत्वपूर्ण चेहरों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम के दौरान बाल अधिकारिता विभाग से लोकेश सेन ने विभागीय तत्परता साझा की, वहीं सृष्टि सेवा समिति के विजय कुशवाह, कमल प्रजापति और चेतन नामा ने जमीनी स्तर पर जागरूकता की कमान संभाली। इसके साथ ही चाइल्ड लाइन की प्रतिनिधि श्वेता अदलक्खा ने संकट में घिरे बच्चों की सहायता और सुरक्षा के पहलुओं पर प्रकाश डाला। प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की इस उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बना दिया।
समापन की बेला में यह आयोजन केवल एक सरकारी औपचारिकता बनकर नहीं रहा, बल्कि बारां की माटी से एक नए सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत के रूप में उभरा। जब तक समाज का हर व्यक्ति बेटियों को बोझ समझने की मानसिकता का त्याग कर उनके पंखों को उड़ान देने का संकल्प नहीं लेगा, तब तक ऐसे अभियान अपनी पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर पाएंगे। धान मंडी प्रांगण से उठी यह शपथ अब जिले के गांव-ढाणी तक पहुंचने के लिए तैयार है, ताकि आने वाला कल बाल विवाह के अभिशाप से मुक्त हो सके।

Pratahkal Bureau
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