यूजीसी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, स्वर्ण महासंघ फाउंडेशन ने जताई खुशी
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए रेगुलेशन बनाने पर रोक लगाते हुए केंद्र सरकार से 29 मार्च तक जवाब मांगा है, स्वर्ण समाज ने इसे भाईचारे की जीत बताया।

बारां में यूजीसी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद स्वर्ण महासंघ फाउंडेशन के पदाधिकारी न्यायिक निर्णय पर चर्चा करते हुए और हर्ष व्यक्त करते हुए।
बारां। यूजीसी एक्ट लागू करने के सुप्रीम कोर्ट द्वारा आमजन की याचिकाओं के जवाब में रोक लगाने पर स्वर्ण महासंघ फाउंडेशन ने हर्ष व्यक्त किया है और कहा कि इससे भाईचारा कायम रहेगा। स्वर्ण महासंघ फाउंडेशन के प्रदेश सलाहकार राजेंद्र शर्मा एवं जिला अध्यक्ष योगेश बाटा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत शुक्ला एवं जयमाला द्वारा मोदी सरकार पर यूजीसी को अस्पष्ट बताते हुए मोदी सरकार से जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख और केंद्र को नोटिस
स्वर्ण महासंघ फाउंडेशन के जिला अध्यक्ष योगेश कुमरा बाटा ने बताया कि यूजीसी एक्ट के नए रेग्युलेशन बनाने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है, जिस पर केंद्र सरकार को जवाब देने हेतु 29 मार्च का समय दिया है। बाटा ने जानकारी दी की कि "जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों व सामान्य वर्ग के लोगों के साथ यूजीसी एक्ट लागू होने के बाद जो कुठाराघाट होता, उस स्थिति को भांपते हुए रोक का निर्णय लिया गया।"
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकान्त नें उन सभी नियमों को नए सिरे से बनाने व नई टीम बनाने, जिसमे सभी वर्गो के लोग शामिल हों, के आदेश जारी कर दिए हैं, जिनके द्वारा नई यूजीसी नीति बनाकर कोर्ट में पेश करनें व आम जन की सहमति के बाद ही लागू किया जाएगा।
सामान्य वर्ग के हितों की सुरक्षा और सामाजिक समरसता
स्वर्ण महासंघ फाउंडेशन के प्रदेश सलाहकार राजेंद्र शर्मा ने यूजीसी एक्ट 2026 लागू करने पर आमादा सरकार ने सामान्य वर्ग के छात्रों के भविष्य को अंधकार में डालने वाले इस काले कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाने पर स्वर्ण समाज की जीत बताया है।
शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने रोक के उक्त निर्णय में कहा कि "हमें आजादी में मिले 75 साल गुजर गए हैं, आज भी जातिगत भेदभाव के अंतर से हम जूंझ रहे हैं, अभी ऐसा समय आ गया है कि अब यहां अंतरजातीय शादियां होनें लगी है, अगर यूजीसी लागू हो जाता है तो यह सब कुछ पुनः खत्म हो जाएगा।"
सामूहिक स्वागत और पदाधिकारियों की प्रतिक्रिया
स्वर्ण महासंघ फाउंडेशन की महिला प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष नीतू गुप्ता व जिला प्रभारी सीमा शर्मा ने कहा कि स्कूलों, हॉस्टलों में सभी एससी, एसटी, ओबीसी व सामान्य वर्ग के छात्र व छात्राएं बिना किसी भेदभाव के एक साथ रहते है। सुप्रीम कोर्ट के द्वारा यूजीसी एक्ट पर रोक लगाने वाले निर्णय का स्वागत करने वालों में शामिल पदाधिकारी:
- जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष एड. सुरेश शर्मा, नरेंद्र गौड़
- उपाध्यक्ष आनंद बंसल, राजेंद्र पंडित, संजय शर्मा, नरेश सोमानी
- दिलीप चौबे, भानु पोरवाल, महेंद्र शर्मा कस्तूरी
- महामंत्री हेमंत शर्मा, सतपाल गुप्ता, ऋषभ मंगल, पियूष गर्ग
- मुकेश मिश्रा अटरू, हनुमान शर्मा छबड़ा, अमन गेरा, डॉ. शोभित शर्मा
- हरीश गेरा, अनुराग सिंह, नगर अध्यक्ष शिव पालीवाल, कौशलकांत शर्मा
- हेमत गुप्ता, अम्बरीश शर्मा, हरिओम प्रधान, देवेंद्र अदलक्खा, सुनील पौराणिक, किशन बंसल
- महिला प्रकोष्ठ की महासचिव प्रीती अरोरा, सोनिया अदलक्खा, सरिता सिंह, अंकिता गुप्ता, गायत्री ठाकुरिया
विवादित प्रावधानों पर स्वर्ण समाज की चिंता
इन सभी ने कहा कि "इस बेहूदा नियम से आपसी भाईचारा बिगड़ जाता और वैमनस्यता बढ़ जाती तथा एक दूसरे के प्रति दुर्भावनावश प्रकरण दर्ज होने से वातावरण खराब हो जाता, इसलिए सुप्रीम कोर्ट का रोक लगाने वाला निर्णय स्वागत योग्य है।"
सवर्ण महासंघ फाउंडेशन की महिला पदाधिकारियों ने बताया कि इस तरह के प्रावधान यूजीसी एक्ट में बनाए गए थे, जिससे सभी समाजों के भीतर एक दूसरे के प्रति द्वैषता के भाव जागृत हो जाते, इसलिए स्वर्ण महासंघ फाउंडेशन के सभी पदाधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस तरह के थोपे गए एक्ट को लागू करने से पहले स्वर्ण समाज को भी पूर्ण रूप से विश्वास में लिया जाना चाहिए।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
