शाहबाद घाटी हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट का विरोध, 1001 हस्ताक्षरों का ज्ञापन भेजा
बारां में शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट को ज्ञापन सौंपकर हाइड्रो पावर प्लांट का स्थान बदलने की मांग की।

बारां जिले की शाहबाद घाटी में प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्लांट के विरोध में प्रधानमंत्री को प्रेषित 1001 हस्ताक्षरों का ज्ञापन पोस्ट करते संरक्षण संघर्ष समिति के सदस्य भानु पोरवाल, मुकेश सोनी व अन्य।
जिले की शाहबाद घाटी के घने प्राकृतिक जंगलों, जैव-विविधता और स्थानीय जनजीवन की सुरक्षा को लेकर चल रहे “शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन” के तहत शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बारां द्वारा व्यापक जन हस्ताक्षर अभियान आयोजित किया गया। अभियान के दौरान एकत्र किए गए 1001 हस्ताक्षरों के आधार पर तैयार ज्ञापन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव तथा देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को प्रेषित किया गया।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से यह मांग रखी गई है कि शाहबाद क्षेत्र में प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्लांट को किसी अन्य स्थान पर स्थापित किया जाए। समिति ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया कि शाहबाद घाटी घने वनों, दुर्लभ वन्यजीवों, महत्वपूर्ण जलस्रोतों तथा पारिस्थितिकी संतुलन के लिए अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है, जहां किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट से गंभीर पर्यावरणीय खतरा उत्पन्न हो सकता है।
समिति के अनुसार प्रस्तावित हाइड्रो पावर परियोजना से जंगलों के विनाश, जैव-विविधता को अपूरणीय क्षति, जल प्रवाह में बाधा तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। इस दौरान यह भी कहा गया कि विकास आवश्यक है, किंतु वह पर्यावरणीय संतुलन और संवेदनशील क्षेत्रों की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
संरक्षण संघर्ष समिति के सदस्य भानु पोरवाल, मुकेश सोनी एवं अन्य सदस्यों ने सरकार से आग्रह किया कि स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए परियोजना को पर्यावरण की दृष्टि से कम संवेदनशील वैकल्पिक स्थल पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही पारदर्शी पर्यावरणीय आकलन, स्थानीय जनसुनवाई तथा विशेषज्ञों की राय को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने की भी मांग की गई।
हस्ताक्षर अभियान में बड़ी संख्या में नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी रही। समिति ने विश्वास जताया कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार एवं न्यायपालिका इस विषय पर संवेदनशील एवं न्यायोचित निर्णय लेंगी, जिससे शाहबाद घाटी की प्राकृतिक विरासत सुरक्षित रह सकेगी।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
