शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन: बारां से शाहबाद तक जनजागृति विरासत यात्रा
शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति ने पावर प्लांट के खिलाफ निकाली पदयात्रा, एडीएम को राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन।

बारां में शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर श्रीराम स्टेडियम से शाहबाद तक निकाली गई जनजागृति विरासत यात्रा में शामिल आंदोलनकारी।
बारां। शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के तहत 22 मार्च को शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बारां के आह्वान पर बारां से शाहबाद तक आयोजित जनजागृति विरासत यात्रा ने पूरे क्षेत्र में जनचेतना की लहर दौड़ा दी। सैकड़ों की संख्या में जुटे आंदोलनकारियों ने सरकार और ग्रीनको के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि शाहबाद के जंगल किसी भी कीमत पर कटने नहीं दिए जाएंगे।
श्रीराम स्टेडियम से यात्रा का शंखनाद और तीखे उद्बोधन
यात्रा की शुरुआत श्रीराम स्टेडियम, बारां से हुई, जहां समिति के संरक्षक बृजेश विजयवर्गीय ने अपने तीखे उद्बोधन में कहा कि "विकास के नाम पर विनाश अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जंगल बचेंगे तभी जीवन बचेगा।" उन्होंने सरकार से पर्यावरणीय संतुलन के साथ निर्णय लेने की मांग की। किशनगंज में राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यकर्ता रोबिन सिंह ने आंदोलन को राष्ट्रीय मुद्दा बताते हुए कहा कि "शाहबाद घाटी केवल बारां की नहीं, पूरे देश की प्राकृतिक धरोहर है। यहां पावर प्लांट लगाना पर्यावरणीय अपराध होगा।"
किसानों और महिला शक्ति का एकजुट आह्वान
भंवरगढ़ में जागो किसान आंदोलन के अध्यक्ष वरदान सिंह हाडा ने किसानों की पीड़ा सामने रखते हुए चेताया कि जंगल कटे तो खेती, पानी और भविष्य तीनों खत्म हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसान इस लड़ाई में पीछे हटने वाला नहीं है। केलवाड़ा में लेडी इंटेक की चेयरमैन नीता शर्मा ने महिला शक्ति की ओर से पर्यावरण संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि "जंगल बचाना हमारी पीढ़ी की जिम्मेदारी है, नहीं तो आने वाली नस्लें हमें माफ नहीं करेंगी।"
समरानियां में जोश और शाहबाद में निर्णायक समापन
समरानियां में गब्बरसिंह यदुवंशी के जोशीले और उत्तेजक उद्बोधन ने आंदोलन में नई ऊर्जा भर दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि जंगल काटने का प्रयास हुआ तो जनआंदोलन और उग्र रूप लेगा। यात्रा का समापन शाहबाद में हुआ, जहां सभी वक्ताओं और आंदोलनकारियों ने संयुक्त रूप से हुंकार भरते हुए प्रशासन को चेताया। इसके पश्चात एडीएम जब्बरसिंह को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें पावर प्लांट को अन्यत्र स्थापित करने तथा शाहबाद जंगल की कटाई तत्काल रोकने की मांग की गई। आंदोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि शाहबाद घाटी के जंगल केवल हरियाली नहीं, बल्कि जीवन, पानी और भविष्य की गारंटी हैं, और इनके संरक्षण के लिए संघर्ष निर्णायक मोड़ तक जारी रहेगा।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
