बारां/कोटा। पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को गति देने वाले प्रख्यात पर्यावरणविद् डॉ. एल.के. दाधीच की नौवीं पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम इस बार एक बड़े जनआंदोलन का मंच बन गया। कोटा के अनंतपुरा स्थित स्मृति वन में एकत्रित हुए पर्यावरण प्रेमियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में शाहबाद के जंगलों को बचाने के लिए हुंकार भरी। इस दौरान शाहबाद जंगल में प्रस्तावित हाइड्रो पावर प्लांट और इसके लिए होने वाली बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई का पुरजोर विरोध करते हुए इस परियोजना को तत्काल निरस्त करने की पुरजोर मांग उठाई गई।

इंटेक बारां चैप्टर के कन्वीनर जितेंद्र शर्मा पम्मी और शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति के हाड़ौती संभाग प्रभारी राजेंद्र जैन ने क्षेत्र की भौगोलिक और पर्यावरणीय महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शाहबाद का यह वन क्षेत्र जैव विविधता, दुर्लभ वन्यजीवों और स्थानीय जल-स्रोतों के अस्तित्व के लिए अत्यंत संवेदनशील है। हाइड्रो पावर प्लांट के नाम पर प्रकृति के इस अनमोल खजाने को नष्ट करना स्थानीय पर्यावरण के लिए आत्मघाती सिद्ध होगा, इसलिए सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस पेड़ कटाई पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।

इस गंभीर विषय पर राजनीतिक गलियारों से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कोटा दक्षिण के विधायक संदीप शर्मा ने कार्यक्रम में स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि विकास के नाम पर पर्यावरण के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्मृति वन और शाहबाद जैसी प्राकृतिक धरोहरों की विभागीय उपेक्षा पर नाराजगी जताते हुए आश्वासन दिया कि वे इस मामले में शीघ्र ही राज्य के वन मंत्री और उच्चाधिकारियों से संवाद करेंगे। वहीं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता पंकज मेहता ने कहा कि डॉ. दाधीच को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम शाहबाद जैसी वनों की अमूल्य विरासतों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखें।

कार्यक्रम में स्मृति वन सलाहकार समिति की वरिष्ठ उपाध्यक्ष गीता दाधीच ने वनों की देखरेख में बरती जा रही विभागीय उदासीनता पर रोष प्रकट किया। समिति के संरक्षक बृजेश विजयवर्गीय ने इस संबंध में एकजुट होकर राज्य सरकार और वन मंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपने की आधिकारिक तैयारी की घोषणा की। इसी मंच से राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आर.सी. साहनी ने मृत्यु उपरांत अपने हृदय को मेडिकल कॉलेज को दान करने और अस्थियों के चूर्ण को स्मृति वन में वृक्षारोपण के लिए समर्पित करने का अनुकरणीय संकल्प लिया।

कार्यक्रम के समापन पर मगरमच्छ रेस्क्यू में विशेष योगदान देने वाले वीरेंद्र सिंह हाडा सहित कई सक्रिय पर्यावरणविदों को सम्मानित किया गया। दाधीच परिवार की ओर से आभार व्यक्त करते हुए वन विभाग से शाहबाद जंगल की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की गई। इस श्रद्धांजलि सभा ने यह साफ संदेश दे दिया है कि शाहबाद जंगल को बचाने का यह आंदोलन अब थमेगा नहीं, बल्कि पर्यावरण विरोधी हर परियोजना के खिलाफ जनविरोध की एक नई इबारत लिखेगा।

Pratahkal Newsroom

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