1 सितंबर से शुरू होगी शाहाबाद जंगल बचाओ जन क्रांति यात्रा, 236 गांवों में चलेगा जनजागरण
शाहाबाद जंगल बचाओ जन क्रांति यात्रा 1 सितंबर से शुरू होगी। 236 गांवों में जनजागरण, पर्यावरण संरक्षण और पंप स्टोरेज परियोजना के संभावित प्रभावों पर संवाद होगा। अभियान के बाद शाहाबाद से जयपुर तक साइकिल यात्रा की योजना है।

तस्वीर में शाहाबाद के हरे-भरे प्राकृतिक जंगल और उनके बीच से गुजरती सड़क दिखाई दे रही है।
बारां। सहरिया आदिवासी अंचल शाहाबाद के प्राकृतिक जंगलों और पर्यावरण के संरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रहे जनअभियान को गति देने के उद्देश्य से शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति, बारां ने “शाहाबाद जंगल बचाओ जन क्रांति यात्रा” का समर्थन किया है। समिति के युवा प्रकोष्ठ के नेतृत्वकर्ता गब्बर यादव के आह्वान पर यह यात्रा 1 सितंबर 2026 को ग्राम टांडा अहिरान से शुरू होकर शाहाबाद तहसील के 236 गांवों में जनजागरण अभियान चलाएगी।
लगभग एक माह तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से संवाद किया जाएगा। इसके माध्यम से शाहाबाद के जंगलों के पर्यावरणीय, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को लेकर जागरूकता पैदा की जाएगी।
समिति ने कहा कि शाहाबाद के जंगल केवल वृक्षों का समूह नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र के जलस्रोतों, कृषि, मिट्टी, जैव-विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रस्तावित पंप स्टोरेज परियोजना के कारण प्राकृतिक वन क्षेत्र और स्थानीय पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर ग्रामीणों के बीच तथ्यात्मक जनसंवाद किया जाएगा।
शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के हाड़ौती संभाग प्रभारी राजेंद्र कुमार जैन ने कहा, “विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन आवश्यक है। किसी भी बड़ी परियोजना के संबंध में स्थानीय लोगों, पर्यावरण विशेषज्ञों और प्रभावित समुदायों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए तथा प्राकृतिक संसाधनों एवं जैव-विविधता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।”
शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति के संरक्षक बृजेश विजयवर्गीय और प्रशांत पाटनी ने कहा, “जंगलों का संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि यहां रहने वाले स्थानीय समुदायों के जीवन और भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। विशेष रूप से सहरिया आदिवासी एवं भील समुदायों की आजीविका, संस्कृति, परंपराएं और जीवन-पद्धतियां लंबे समय से प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी रही हैं।”
समिति ने स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य किसी व्यक्ति या समुदाय के विरुद्ध खड़ा होना नहीं, बल्कि जंगल और उनसे जुड़े समुदायों के संरक्षण के लिए व्यापक जनचेतना पैदा करना है।
जनक्रांति यात्रा के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में जंगलों की कटाई के दीर्घकालीन दुष्परिणामों को लेकर भी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। समिति ने कहा कि स्थानीय आवश्यकताओं के कारण वन क्षेत्र पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए वैकल्पिक उपायों, पौधरोपण और स्थानीय प्रजातियों के पुनर्वनीकरण को बढ़ावा देना आवश्यक है। जहां वन क्षेत्र क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, वहां स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप देशी एवं स्थानीय प्रजातियों के पौधों से पुनर्वनीकरण के लिए भी ग्रामीणों को प्रेरित किया जाएगा।
शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति बारां के अनुरोध पर पांच दिवसीय जन संवाद यात्रा आयोजित कर चुके राष्ट्रीय पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता रॉबिन सिंह ने कहा, “236 गांवों की जनजागरूकता यात्रा पूर्ण होने के बाद शाहाबाद से जयपुर तक साइकिल यात्रा निकालने की भी योजना है। इस यात्रा के माध्यम से शाहाबाद के जंगलों, पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की समस्याओं और मांगों को राजस्थान की राजधानी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।”
समिति के युवा प्रकोष्ठ के नेतृत्वकर्ता गब्बर यादव ने बताया कि 18 अगस्त 2026 को बारां जिला कलेक्ट्रेट में एडीएम महोदय को यात्रा के संबंध में विस्तृत ज्ञापन एवं पूर्व सूचना पत्र सौंपा गया। इसमें यात्रा के उद्देश्य, प्रस्तावित कार्यक्रम तथा आगामी जयपुर साइकिल यात्रा की जानकारी दी गई। उनके अनुसार प्रशासन की ओर से यात्रा के संबंध में अनुमति प्रदान की गई है।
समिति ने कहा कि पूरा अभियान शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल, व्यक्ति अथवा संस्था से टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि शाहाबाद के जंगलों और पर्यावरण संरक्षण के लिए जनमत को मजबूत करना है।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
