बारां। विश्व चीता दिवस के अवसर पर पंचफल बोटनिकल गार्डन कुंजैड़ और भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटेक) वराह नगरी बारां अध्याय द्वारा आयोजित विचार गोष्ठी शनिवार को उत्साह, चिंता और उम्मीदों के संग संपन्न हुई। चीता संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और बारां जिले के लिए उभरते वन्य पर्यटन की संभावनाओं पर केन्द्रित इस चर्चा में विशेषज्ञों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और किसानों ने अपनी गहरी चिंता और सुझाव प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित शाहबाद घाटी संरक्षण समिति बारां के संरक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत पाटनी ने कहा कि खेतों में नीलगाय, हिरण और जंगली सूअर की बढ़ती संख्या किसानों के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीता एक शीर्ष शिकारी के रूप में जंगल की पूरी खाद्य श्रृंखला को संतुलित रखता है। इसके रहने से शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या नियंत्रित रहती है और वनस्पतियों व फसल क्षेत्रों पर दबाव कम होता है। पाटनी के अनुसार, यदि चीता का विस्तार सुरक्षित हो, तो कृषि क्षेत्र में होने वाले नुकसान में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

इंटेक बारां के संयोजक और पर्यावरण एक्टिविस्ट जितेंद्र कुमार शर्मा ने इसे जिले के लिए अभूतपूर्व अवसर बताया। उन्होंने कहा कि कूनो नेशनल पार्क से बारां के जंगलों में चीता का बार-बार पहुँचना यह संकेत देता है कि यहां का प्राकृतिक आवास उसकी टेरिटरी विस्तार के लिए अनुकूल है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यदि चीता यहां स्थायी क्षेत्र विकसित करता है, तो इससे इको-टूरिज्म और वाइल्डलाइफ टूरिज्म को नई गति मिलेगी, जिसका सीधा लाभ स्थानीय समुदायों और अर्थव्यवस्था को होगा।

युवा किसान नेता दीपक यादव ने प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए कूनो चीता प्रोजेक्ट की सफलता पर चर्चा करते हुए कहा कि कूनो–शाहबाद–गांधीसागर चीता कॉरिडोर का निर्माण अत्यावश्यक है। उन्होंने चेताया कि यदि इस प्रस्तावित मार्ग में ग्रीनको एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड की हाइड्रो पावर परियोजना से अवरोध उत्पन्न होता है, तो इसे अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए, ताकि चीता का प्राकृतिक मूवमेंट बाधित न हो।

युवा किसान विजेश मालव ने भी बारां और शेरगढ़ फॉरेस्ट रिजर्व को चीता के अनुकूल आवास बताते हुए कहा कि यह प्रजाति यहां की पारिस्थितिकी और खेती—दोनों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने नीलगाय और सूअर की बढ़ती आबादी पर रोक लगाने में चीता को प्राकृतिक समाधान बताया।

विचार गोष्ठी में सहभागी वक्ताओं ने एक स्वर में आग्रह किया कि कूनो से बारां आए चीते पी-2 के नेचुरल मूवमेंट में कोई बाधा न डाली जाए तथा उसे ट्रेंकुलाइज कर जबरन वापस कूनो भेजने की कार्यवाही से बचा जाए। विशेषज्ञों ने प्रस्ताव रखा कि बारां वन मंडल से वनकर्मियों की एक टीम को कूनो नेशनल पार्क में विशेष प्रशिक्षण हेतु भेजा जाए, ताकि वे ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग और संरक्षण संबंधी तकनीकों में दक्ष हो सकें।

चर्चा में यह भी रेखांकित किया गया कि एनटीसीए द्वारा तैयार किए गए चीता एक्शन प्लान में 17 हजार वर्ग किलोमीटर के विस्तृत लैंडस्केप को कूनो से गांधीसागर अभयारण्य तक निर्धारित किया गया है। इस योजना पर गंभीरता से अमल ही चीता की दीर्घकालिक सुरक्षा और प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजना की सफलता सुनिश्चित करेगा। वक्ताओं ने चेताया कि यदि शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व—जो कूनो से मात्र 40 किलोमीटर दूरी पर स्थित है—में प्रस्तावित औद्योगिक गतिविधियाँ बढ़ती हैं, तो यह पूरे प्रोजेक्ट को खतरे में डाल सकती हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ किसान राम प्रसाद योगी ने की। अंत में पंचफल बोटनिकल गार्डन कुंजैड़ की ओर से सभी उपस्थित प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया, जबकि विचार गोष्ठी ने बारां में चीता संरक्षण और पर्यावरणीय भविष्य को लेकर नई उम्मीदों का संदेश दिया।

Pratahkal Bureau

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