बाड़मेर, फलोदी और बीकानेर में धार्मिक स्थलों को ध्वस्त करने के विरुद्ध एसडीपीआई का प्रदर्शन
राजस्थान के बाड़मेर, फलोदी और बीकानेर में धार्मिक स्थलों को तोड़े जाने की घटनाओं से उपजा आक्रोश। एसडीपीआई ने बारां में राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर की निष्पक्ष जांच और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की पुरजोर मांग। क्या सुरक्षित है सामाजिक सद्भाव?

बारां कलेक्ट्रेट के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए एसडीपीआई के पदाधिकारी और कार्यकर्ता, बाड़मेर और अन्य जिलों में धार्मिक स्थलों पर हुई कार्यवाही के खिलाफ राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
बारां। राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किए जाने की घटनाओं ने राज्य के सामाजिक सद्भाव पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। इसी कड़ी में, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) की बारां जिला इकाई ने एक मुखर विरोध प्रदर्शन करते हुए राज्य की प्रशासनिक कार्यवाही के विरुद्ध अपना कड़ा रोष व्यक्त किया है। पार्टी ने इन घटनाओं को आमजन की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य करार दिया है और भारत के राष्ट्रपति से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
विरोध प्रदर्शन का सिलसिला बारां शहर के अंजुमन चौराहे से शुरू हुआ, जहां पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। हाथों में तख्तियां लिए और नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ताओं का यह समूह कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पहुंचा। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य प्रशासन का ध्यान पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, फलोदी और बीकानेर जिलों में हाल ही में हुई धार्मिक स्थलों को गिराने की कार्यवाही की ओर आकर्षित करना था।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर एसडीपीआई के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा। इस अवसर पर पार्टी के जिलाध्यक्ष अब्दुल अजीज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धार्मिक स्थलों को हटाने या ध्वस्त करने जैसी संवेदनशील कार्रवाई से न केवल लोगों की आस्था को ठेस पहुंचती है, बल्कि क्षेत्र में व्याप्त सामाजिक भाईचारे और सौहार्द पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह की घटनाएं संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का हनन करती हैं।
ज्ञापन के माध्यम से एसडीपीआई ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित मामलों की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। पार्टी ने यह भी आग्रह किया कि सभी समुदायों के धार्मिक स्थलों के प्रति सरकार को एक समान और न्यायसंगत नीति अपनानी चाहिए। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कार्यवाही कानून और संवैधानिक प्रक्रियाओं के दायरे में ही होनी चाहिए। पार्टी नेताओं ने सरकार को सचेत करते हुए कहा कि भारत की विविधता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक और प्रशासन का सामूहिक उत्तरदायित्व है, जिसके लिए संवेदनशीलता और पारदर्शिता नितांत आवश्यक है।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष अब्दुल अजीज, महासचिव अलीम मंसूरी, प्रदेश कोषाध्यक्ष जाकिर हुसैन, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य इफ्तिखार अहमद उमर सहित सलमान, इरशाद अंसारी, रईस अहमद, गुलशेर अहमद, वसीम शेख, शोएब अहमद, मुजफ्फर, शेर अली, हाजी अशफाक हुसैन, इमरान और बाबूलाल बैरवा सहित पार्टी के अनेक कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। यह प्रदर्शन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि कानून के शासन और धार्मिक अधिकारों के सम्मान के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता का एक प्रतीक बना रहा, जिसने स्थानीय प्रशासन को गंभीरता के साथ इन संवेदनशील विषयों पर विचार करने के लिए विवश कर दिया है।

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