बारां में संघ शताब्दी वर्ष पर जन गोष्ठी, दुर्गादास बोले- सामूहिक प्रयासों से बनेगा वैभव संपन्न भारत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा बारां में प्रबुद्ध जन गोष्ठी आयोजित, अखिल भारतीय घुमंतू कार्य संयोजक ने राष्ट्र निर्माण में समाज के नेतृत्वकारी वर्ग की भूमिका पर दिया जोर।

बारां की सार्वजनिक धर्मादा संस्था धर्मशाला में संघ के शताब्दी वर्ष पर आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी के दौरान मंचासीन मुख्य वक्ता दुर्गादास, विभाग संघचालक रमेश चंद्र मेहता एवं अन्य अतिथि।
बारां। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बारां नगर द्वारा संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सार्वजनिक धर्मादा संस्था धर्मशाला के सभागार में एक भव्य एवं गरिमामय प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नगर के विभिन्न क्षेत्रों—शिक्षा, व्यवसाय, समाज सेवा, प्रशासन एवं संस्कृति से जुड़े लगभग 150 प्रबुद्ध एवं प्रमुख नागरिकों की सक्रिय एवं उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही, जिससे आयोजन का महत्व और अधिक बढ़ गया।
देशभक्ति के भाव के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात उपस्थित जनों द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया गया, जिससे सभागार देशभक्ति के भाव से ओतप्रोत हो उठा। तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया गया। गोष्ठी का उद्देश्य संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर समाज के प्रबुद्ध वर्ग के साथ संवाद स्थापित कर राष्ट्र निर्माण के विभिन्न आयामों पर चिंतन एवं सुझाव प्राप्त करना था।
संस्कारित और संगठित समाज के निर्माण पर जोर
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित अखिल भारतीय घुमंतू कार्य संयोजक दुर्गादास ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विगत 100 वर्षों से संस्कारित, अनुशासित एवं संगठित समाज के निर्माण हेतु निरंतर कार्य कर रहा है।" उन्होंने बताया कि संघ के स्वयंसेवक समाज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र—शिक्षा, सेवा, सुरक्षा, ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं सांस्कृतिक जागरण—में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
भारत के गौरवशाली इतिहास और भविष्य का रोडमैप
उन्होंने अपने वक्तव्य में भारत के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि "हमारा देश प्राचीन काल में ज्ञान, विज्ञान, शौर्य, कला, कौशल और आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी राष्ट्र रहा है।" वर्तमान समय में आवश्यकता है कि हम सभी मिलकर सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सकारात्मक चिंतन के आधार पर कार्य करें, जिससे भारत पुनः अपने वैभवशाली स्थान को प्राप्त कर सके। दुर्गादास ने विशेष रूप से समाज के प्रबुद्ध, प्रभावशाली एवं नेतृत्वकारी वर्ग की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि "यह वर्ग समाज को दिशा देने में सक्षम है। यदि यह वर्ग राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय सहभागिता निभाए, तो समाज में व्यापक एवं सकारात्मक परिवर्तन संभव है।"
प्रबुद्धजनों का संवाद और राष्ट्र निर्माण के सुझाव
गोष्ठी के दौरान उपस्थित विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख जनों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण, हिंदुत्व के मूल्यों के प्रचार-प्रसार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, युवाओं के मार्गदर्शन तथा राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जैसे विषयों पर अपने सुझाव रखे। सभी ने एक स्वर में समाज को संगठित, संस्कारित एवं आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान सौहार्दपूर्ण वातावरण में संवाद एवं विचार-विमर्श हुआ, जिससे अनेक उपयोगी सुझाव सामने आए। यह गोष्ठी केवल एक औपचारिक आयोजन न होकर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सकारात्मक संवाद का एक सशक्त मंच साबित हुई।
आभार प्रदर्शन एवं समापन
कार्यक्रम के अंत में विभाग संघचालक रमेश चंद्र मेहता ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं उपस्थित प्रमुख नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए उनके सहयोग एवं सहभागिता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
