आरपीएससी सदस्य के रूप में प्रो. संतोष आनंद का मनोनयन: शिक्षा जगत के लिए एक गौरवमयी उपलब्धि
राजस्थान लोक सेवा आयोग के नए सदस्य प्रो. संतोष आनंद के मनोनयन से शिक्षा जगत में हर्ष की लहर है। विद्या भारती के इस प्रखर शिक्षाविद् के लिए आयोजित भव्य अभिनंदन समारोह में क्या रही भविष्य की कार्ययोजना और किस संकल्प के साथ उन्होंने संभाला पद?

भीलवाड़ा स्थित आदर्श विद्या मंदिर में आरपीएससी सदस्य प्रो. संतोष आनंद का स्वागत करते विद्या भारती के पदाधिकारी।
राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) में सदस्य के रूप में ख्याति प्राप्त शिक्षाविद् और विद्या भारती चित्तौड़ प्रांत के अध्यक्ष प्रोफेसर संतोष आनंद का मनोनयन प्रदेश के शैक्षिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस महत्वपूर्ण संवैधानिक नियुक्ति पर विद्या भारती के पदाधिकारियों ने न केवल हर्ष व्यक्त किया है, बल्कि इसे मूल्याधारित शिक्षा की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। उनकी नियुक्ति की घोषणा के साथ ही भीलवाड़ा स्थित आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक भव्य अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षा जगत से जुड़े दिग्गज और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।
समारोह के दौरान विद्या भारती चित्तौड़ प्रांत के मंत्री डॉ. सुरेंद्र अरोड़ा, निरीक्षक नवीन कुमार झा और प्रांत सचिव मानेंग पटेल ने संयुक्त रूप से राजस्थान सरकार के इस निर्णय का हृदय से स्वागत किया। पदाधिकारियों ने अपने संबोधन में कहा कि प्रोफेसर संतोष आनंद का संपूर्ण जीवन शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण और सामाजिक सरोकारों का प्रतीक रहा है। उनका यह मनोनयन व्यक्तिगत उपलब्धि मात्र नहीं है, बल्कि उस पूरी विचारधारा और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का सम्मान है, जो दशकों से मूल्याधारित शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों और कार्यकर्ताओं ने पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके उज्ज्वल और प्रेरणादायी कार्यकाल के लिए मंगलकामनाएं प्रेषित कीं।
अपनी नई जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए प्रोफेसर संतोष आनंद ने कृतज्ञता व्यक्त की और अपने संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि राजस्थान लोक सेवा आयोग जैसी प्रतिष्ठित और संवैधानिक संस्था की महत्ता को समझते हुए वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और पूर्ण निष्पक्षता के साथ करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग में रहते हुए राष्ट्रहित और समाजहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना ही उनका मूल मंत्र रहेगा। प्रोफेसर आनंद ने युवाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वे प्रशासनिक परीक्षाओं में शामिल होने वाले राजस्थान के होनहार युवाओं के विश्वास को अक्षुण्ण रखने और आयोग की विश्वसनीयता को और अधिक ऊंचाई देने के लिए निरंतर कार्य करेंगे।
यह मनोनयन न केवल प्रोफेसर संतोष आनंद के व्यक्तित्व की स्वीकार्यता को दर्शाता है, बल्कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में अनुभवी शिक्षाविदों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक दूरगामी निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासनिक गलियारों और शैक्षिक संस्थाओं में इसे एक नई ऊर्जा के रूप में स्वीकार किया जा रहा है, जहाँ उम्मीद की जा रही है कि उनके कार्यकाल में पारदर्शिता और प्रमाणिकता को नए आयाम प्राप्त होंगे।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
