RGHS दवा विक्रेताओं का भुगतान 8-9 महीने अटका, PDVS ने नियम स्पष्ट करने की मांग की
RGHS दवा विक्रेताओं ने नियमों की अस्पष्टता, TPA कटौती और 8-9 महीने से लंबित भुगतान को लेकर सरकार से तत्काल समाधान की मांग की है।

तस्वीर में दवा विक्रेता समिति के सदस्य बारां कार्यालय में ज्ञापन सौंपते हुए दिख रहे हैं।
प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति (PDVS) ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के अंतर्गत अधिकृत दवा विक्रेताओं की समस्याओं को लेकर सरकार के सामने गंभीर चिंताएं रखी हैं। समिति ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) बारां, जो RGHS के नोडल अधिकारी भी हैं, के माध्यम से परियोजना अधिकारी, RGHS जयपुर को ज्ञापन भेजकर नियमों में स्पष्टता लाने और केमिस्टों के बकाया भुगतान तत्काल जारी करने की मांग की है।
प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति बारां के जिला प्रभारी कृष्ण शर्मा ने बताया कि RGHS और दवा विक्रेताओं के बीच हुए मूल समझौते (MOU) के अनुसार डॉक्टरों द्वारा पर्चे पर लिखी गई ब्रांडेड दवा के स्थान पर किसी दूसरी कंपनी की दवा देना यानी ब्रांड सब्स्टीट्यूशन पूरी तरह प्रतिबंधित है। दूसरी ओर, विभाग की हालिया गाइडलाइंस और लाभार्थियों की मांग के कारण केमिस्टों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
समिति ने विभाग से स्पष्ट रूप से पूछा है कि क्या फार्मेसी को नियमों में ढील देकर दवा बदलने की अनुमति है या नहीं। समिति ने इस संबंध में तत्काल लिखित निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि दवा विक्रेताओं को नियमों की अस्पष्टता के कारण बाद में परेशानी का सामना न करना पड़े।
इसके साथ ही समिति ने बीमा दावों की जांच करने वाली एजेंसी (TPA) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि TPA द्वारा केमिस्टों के जायज बिलों में भी मनमानी और गलत कटौतियां (Deductions) यह कहते हुए की जा रही हैं कि उनके द्वारा दी गई दर बाजार की औसत दर से अधिक है।
समिति का कहना है कि RGHS के दवा विक्रेता दवाओं की MRP के अनुसार बिलिंग करते हैं। विभाग द्वारा खरीद बिल मांगे जाने पर उन्हें प्रस्तुत करने के बावजूद कटौती किया जाना भी समिति ने मनमानी बताया है। समिति ने मांग की है कि पूर्व में की गई सभी गलत कटौतियों की तत्काल समीक्षा की जाए और दवा विक्रेताओं की रोकी गई पात्र राशि वापस जारी की जाए।
दवा विक्रेताओं की सबसे बड़ी चिंता भुगतान में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर है। वर्तमान में केमिस्टों को लगभग 8 से 9 महीने के विलंब से भुगतान मिल रहा है। समिति के अनुसार, इतनी लंबी देरी के कारण दवा विक्रेताओं के लिए व्यापार चलाना और दवाओं का स्टॉक बनाए रखना बेहद मुश्किल हो गया है।
समिति ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि केमिस्टों को अस्पष्ट नियमों के भरोसे काम करने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता, ताकि बाद में उन्हीं नियमों के आधार पर उनके भुगतान में कटौती की जाए। प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति ने सरकार और RGHS प्रबंधन से इस संवेदनशील विषय पर शीघ्र निर्णय लेकर पारदर्शी व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया है, जिससे आम जनता और केमिस्ट दोनों को राहत मिल सके।
इस अवसर पर प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति के जिला अध्यक्ष कृष्ण शर्मा, जिला रीटेल समिति के संरक्षक प्रेम खंडेलवाल, सौरभ भार्गव, हेमंत गुप्ता, राजेंद्र गौत्तम, आयुष दवा विक्रेता उत्तम गुप्ता और योगेश गुप्ता उपस्थित रहे।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
