बारां। बारां की धरा पर राष्ट्रभक्ति और अनुशासन का एक अनूठा संगम उस समय देखने को मिला जब नगर के मुख्य मार्गों से राष्ट्र सेविका समिति का भव्य पथ संचलन गुजरा। नगर क्षेत्र में दूसरी बार आयोजित हुए इस संचलन में सैकड़ों की संख्या में राष्ट्र सेविकाओं ने अपनी कदमताल से न केवल संगठन की शक्ति का परिचय दिया, बल्कि सनातन संस्कृति और नारी सशक्तिकरण का एक जीवंत संदेश भी प्रसारित किया। आत्मविश्वास से लबरेज सेविकाओं के चेहरे और अनुशासन की एकरूपता ने पूरे नगर को राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।

इस गरिमामयी कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ श्रीराम स्टेडियम के विशाल प्रांगण में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। आयोजन की गरिमा बढ़ाते हुए मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में चित्तौड़ प्रांत कार्यवाहिका रीना शुक्ला और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही महिला एवं बाल विकास विभाग की सेवानिवृत्त महिला पर्यवेक्षक कुसुमलता जैन उपस्थित रहीं। अतिथियों के स्वागत और अभिनंदन के पश्चात बौद्धिक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें सेविकाओं को राष्ट्र के प्रति उनके कर्तव्यों का बोध कराया गया।





मुख्य वक्ता रीना शुक्ला ने अपने ओजस्वी संबोधन में संगठन के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया कि सन् 1936 में लक्ष्मीबाई केलकर ने राष्ट्र सेविका समिति की आधारशिला रखी थी। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि इस पथ संचलन का मूल उद्देश्य महिलाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से सशक्त बनाना है ताकि वे सामाजिक, राष्ट्रीय और सनातन संस्कृति के संरक्षण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें। श्रीमती शुक्ला ने संघ के 'पंच परिवर्तन' का उल्लेख करते हुए कहा कि कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वदेशी के प्रति आग्रह और नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन में महिलाओं की भूमिका आज के समय में और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

बौद्धिक सत्र के उपरांत घोष वाद्य यंत्रों की गूँज के साथ पथ संचलन का प्रारंभ हुआ। समान वेशभूषा में सजी सेविकाएं जब अनुशासित पंक्तियों में कदम से कदम मिलाकर निकलीं, तो दृश्य अत्यंत मनोहारी था। खड़गधारी सेविकाओं की ध्वज वाहिनी सबसे आगे चल रही थी, जिनके पीछे अनुशासनबद्ध होकर सैकड़ों सेविकाएं चल रही थीं। संचलन श्रीराम स्टेडियम परिसर से शुरू होकर चौथ माता मंदिर, हॉस्पिटल रोड, धर्मादा चौराहा, पुराना थाना और चौमुखा होते हुए श्रीजी मंदिर पहुँचा। वहां से सब्जीमंडी और प्रताप चौक होते हुए यह पुनः श्रीराम स्टेडियम पर संपन्न हुआ।

पूरे मार्ग में सर्व हिंदू समाज और नगरवासियों ने सेविकाओं का अभूतपूर्व स्वागत किया। जयघोष और नारों के बीच कई स्थानों पर पुष्पवर्षा की गई और पटाखों के साथ अभिनंदन किया गया। अंततः, राष्ट्रगीत 'वंदेमातरम' के गायन के साथ इस भव्य आयोजन का समापन हुआ। स्थानीय नागरिकों ने इस संचलन की सराहना करते हुए इसे संस्कार, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक प्रेरक कदम बताया।

Pratahkal Bureau

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