राजस्थान: पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारियों ने शुरू किया स्वाभिमान बचाओ आंदोलन
मंत्रालयिक कर्मचारियों ने लंबित मांगों के समाधान के लिए प्रदेश भर में जिला अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।

बारां जिला परिषद कार्यालय में अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपते पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी और सदस्य।
बारां। राजस्थान में पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन ने अपनी लंबित और न्यायोचित मांगों के समाधान हेतु सरकार के विरुद्ध 'स्वाभिमान बचाओ आन्दोलन' का शंखनाद कर दिया है। संगठन के बैनर तले प्रदेश के सभी 41 जिलों में मंत्रालयिक कर्मचारियों ने एकजुट होकर जिला कलेक्टरों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा, जो राज्य सरकार की नीतियों के प्रति कर्मचारियों के गहरे असंतोष को स्पष्ट करता है। यह आंदोलन न केवल कर्मचारियों के आत्मसम्मान की लड़ाई है, बल्कि अपनी अनदेखी के खिलाफ एक मुखर चेतावनी भी है।
आंदोलन की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए संगठन के जिला अध्यक्ष योगेंद्र सिंह नरुका ने बताया कि यह आन्दोलन मंत्रालयिक कर्मचारियों की उपेक्षा के विरुद्ध शुरू किया गया है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले समय में संघर्ष को और अधिक व्यापक और उग्र किया जाएगा। संगठन द्वारा जारी आगामी कार्यक्रमों की सूची में एक सप्ताह का कलम डाउन आन्दोलन, सद्बुद्धि यज्ञ और जनप्रतिनिधियों व मंत्रियों का घेराव प्रमुख है। आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संगठन ने 6 जुलाई को मुख्यमंत्री के घेराव और 7 जुलाई को जयपुर के जल महल में प्रदेश कार्यकारिणी और जिला पदाधिकारियों द्वारा 'जल समाधि' लेने का संकल्प लिया है।
बारां जिले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। इस अवसर पर सुरेंद्र सोनी, रामचरण मीणा, अरविंद वर्मा, हामिद हुसैन, गोविंद शर्मा, निर्मल नागर, श्यामसुंदर वर्मा, भूरालाल, गंगाधर नागर, महेंद्र सिंह जादौन, अविनाश मीणा, धनराज मालव, सीमा, सरोज सोनी, उषा यादव और सुनीता मीणा सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। संगठन के पदाधिकारियों को उम्मीद है कि सरकार अब समय रहते सकारात्मक कदम उठाएगी, अन्यथा प्रदेश के कर्मचारी अपने हकों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। यह आन्दोलन अब राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

