सार्वजनिक पुस्तकालय दिवस के अवसर पर पुस्तकालय अध्यक्ष के पद पर वर्षों से कार्यरत रहे लेखक रामेश्वर गौतम ने पुस्तकालयों की भूमिका और वर्तमान समय में पढ़ने की प्रवृत्ति पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर जारी संदेश में उन्होंने कहा कि पुस्तकालय किताबों का गोदाम नहीं, बल्कि साधारण आम इंसान का कॉलेज है, जहां केवल एक चीज आवश्यक है—पढ़ने की भूख।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि गांव में जब बिजली नहीं थी, तब दादा-दादी लालटेन की रोशनी में इसी पुस्तकालय की किताबें पढ़कर अधिकारी बने। इसके विपरीत आज मोबाइल में सब कुछ उपलब्ध होने के बावजूद दिमाग खाली दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि कॉल स्क्रोल करने से जानकारी मिलती है, लेकिन ज्ञान नहीं, जबकि वास्तविक ज्ञान तब प्राप्त होता है जब व्यक्ति 10 पन्ने पलटकर, लाइन के नीचे उंगली रखकर पुस्तक का अध्ययन करता है।

रामेश्वर गौतम ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान का अथाह सागर है और यह समाज में समानता का वास्तविक माध्यम है। अमीर का बेटा 5000 की किताब खरीद सकता है, लेकिन मजदूर और किसान का बेटा पुस्तकालय में जाकर अंबेडकर और कलाम साहब की किताबें पढ़ सकता है। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी पर्याप्त पुस्तकें उपलब्ध हो रही हैं और यहां सपने निःशुल्क मिलते हैं। एकांत में पुस्तक और पुस्तकालय हर स्तर पर मार्गदर्शन करते हैं।

उन्होंने कहा कि क्रांतिकारी और महापुरुषों की जीवनी पढ़ने से ज्ञात होता है कि विचारों की क्रांति पुस्तकों से ही प्रेरणा लेकर जन्म लेती है। जब कोई मित्र न हो और मोबाइल से बोरियत हो, तब पुस्तकालय जाना चाहिए, जहां प्रेमचंद आपसे संवाद करते हैं, शिवानी दीदी कहानी सुनाती हैं और अब्दुल कलाम चांद तक ले जाते हैं।

उन्होंने वर्तमान पीढ़ी पर चिंता जताते हुए कहा कि आज बच्चे पबजी खेल रहे हैं और रील बना रहे हैं, लेकिन 10 मिनट किताब पढ़ने का समय नहीं है। उन्होंने कहा कि रील 15 सेकंड हंसाती है, जबकि किताब जीवनभर रास्ता दिखाती है।

इस अवसर पर उन्होंने अपील की कि महीने में या सप्ताह में कम से कम एक दिन पुस्तकालय जाकर एक घंटा पुस्तक पढ़ने का संकल्प लें तथा घर में रखी पुरानी कोर्स की किताबें और अनमोल साहित्य नजदीकी पुस्तकालय में दान करें, ताकि वह दूसरों के काम आ सके।

उन्होंने केरल के पी.एन. पनिक्कर का उल्लेख करते हुए कहा कि 1995 में उनके निधन के समय उन्होंने संदेश दिया था—“पढ़ो और बढ़ो।” उन्होंने केरल में व्यापक पुस्तकालय स्थापित कर राज्य को 100 प्रतिशत साक्षरता की ओर अग्रसर किया।

उन्होंने कहा कि पुस्तकें बीते जमाने, आज और कल की बातें कहती हैं और प्रत्येक पन्ना जीवन को बोलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी में चलो, तकदीर बदलती है।

बारां शहर में चार मूर्ति चौराहे के पास स्थित सार्वजनिक जिला पुस्तकालय में लोगों से अधिकाधिक जुड़ने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि पुस्तकालय और पुस्तकें सभी की प्रतीक्षा कर रही हैं।

Pratahkal Bureau

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