चित्तौड़गढ़ के गांधीनगर स्थित प्रांत प्रशिक्षण केंद्र में सप्त दिवसीय प्रशिक्षु प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में प्रांत निरीक्षक नवीन कुमार झा ने भारतीय शिक्षा दर्शन की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि शिक्षा केवल सूचनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर निहित श्रेष्ठता को जागृत कर उसे श्रेष्ठ मनुष्य बनाने की प्रक्रिया है। उन्होंने भारतीय शिक्षा दर्शन को मनुष्य के समग्र विकास और उसके अंतर्निहित श्रेष्ठ तत्व के जागरण की जीवनदृष्टि बताया।

नवीन कुमार झा ने ‘भारतीय शिक्षा दर्शन’ विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह दर्शन व्यक्ति को अपने अधिकारों के साथ दूसरों के अधिकारों की रक्षा और संरक्षण का संस्कार देता है। परिवार से शुरू होने वाला यह भाव धीरे-धीरे समाज, राष्ट्र और संपूर्ण सृष्टि के प्रति उत्तरदायित्व में परिवर्तित होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा दर्शन मनुष्य को स्व से सर्व की ओर ले जाने वाली यात्रा है, जिसमें व्यक्तिगत विकास के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व और परस्पर संरक्षण की भावना भी महत्वपूर्ण है।

भारतीय शिक्षा पद्धति में पंचकोशीय विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय और आनंदमय कोशों का संतुलित विकास ही मनुष्य के सर्वांगीण व्यक्तित्व का आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय शिक्षा दर्शन अधिकारों की अपेक्षा कर्तव्य, संवेदना, सह-अस्तित्व और परस्पर संरक्षण की चेतना को अधिक महत्व देता है। इस दृष्टिकोण के अनुसार, वास्तविक शिक्षा वही है, जो विद्यार्थी के भीतर मौजूद श्रेष्ठ गुणों को जागृत कर उसके व्यक्तित्व को बेहतर दिशा प्रदान करे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता नवीन कुमार झा, प्रांत सचिव मानेंगे पटेल और राजस्थान क्षेत्र सह प्रशिक्षण प्रमुख ललित दवे ने भारत माता एवं मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन सत्र में बौद्धिक प्रमुख दिनेश चंद्र भट्ट ने अतिथियों का परिचय कराया। कार्यक्रम का संचालन बारां जिला सचिव राजेंद्र कुमार शर्मा ने किया।

इस अवसर पर प्रशिक्षण प्रमुख महेंद्र सिंह सिसोदिया, संगीत प्रमुख ममता सोनी, ललित बारोतिया और तकनीक संयोजक नरेंद्र चास्टा सहित प्रशिक्षण वर्ग से जुड़े पदाधिकारी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे। सप्त दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में प्रशिक्षु प्रधानाचार्यों को उनके व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, भारतीय शिक्षा दृष्टि, विद्यालय प्रबंधन तथा शैक्षिक एवं सांस्कृतिक दायित्वों से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। इस प्रशिक्षण का केंद्र प्रधानाचार्यों को शिक्षा के भारतीय दृष्टिकोण से परिचित कराने के साथ विद्यालय संचालन और शैक्षिक दायित्वों के प्रति उनकी समझ को विकसित करना है।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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