बारां। केलवाड़ा वनवासी कल्याण आश्रम की संपन्न हुई बैठक में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के साथ पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा किए गए अपमान की घोर निंदा की गई। बैठक में विभाग संगठन मंत्री नरेन्द्र कुमार ने बताया कि माननीय राष्ट्रपति के 7 मार्च को दार्जिलिंग (सिलिगुड़ी, प. बंगाल) में संपन्न हुए अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राज्य सरकार का व्यवहार बहुत ही निंदनीय और अपमानजनक रहा।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रशासन का असहयोग और बाधाएं

इस अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में भारत सहित पड़ोसी देश बांग्लादेश, नेपाल एवं भूटान से भी बड़ी संख्या में संथाल एवं अन्य जनजाति व नागरिक समाज एकत्र हुआ था। सम्मेलन का स्थल अचानक दो दिन पहले बदल दिया गया, जो इतने बड़े सम्मेलन एवं राष्ट्रपति की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए बहुत छोटा था। प्रशासन ने अवांछित प्रयास कर आनेवालों की संख्या कम करने का प्रयास किया और प्रतिनिधियों के सम्मुख कई अडचने उत्पन्न की गई।

संवैधानिक मर्यादा और सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन

"राज्य सरकार एवं स्थानीय प्रशासन ने माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की सुरक्षा व्यवस्था में बरती लापरवाही, प्रोटोकाल के अनुसार मुख्यमंत्री या किसी वरिष्ठ मंत्री की अनुपस्थिति, उनके साथ किए गए असहयोग और दंभभरे व्यवहार की अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम घोर निंदा करता है।"

यह न केवल सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति का अपमान हुआ है बल्कि देश के संपूर्ण जनजाति समाज एवं संथाल भाषा का भी अपमान है।

अमृत महोत्सव में तुच्छ राजनीति पर सवाल

देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, पर राष्ट्रपति व अन्य उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को तुच्छ राजनीति से दूर रखना हम कब सीखेंगे? यह विचारणीय पहलू रहा और इस बैठक में समिति के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे।

Pratahkal Bureau

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