परमहंस आश्रम के विशाल पांडाल में सप्तदिवसीय 11 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ, हनुमान मूर्ति प्राणप्रतिष्ठा एवं शिवपुराण कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा को महामंडलेश्वर श्री रामनरेश दास जी महाराज ने संबोधित किया।

अपने उद्बोधन में महाराज श्री ने शिवपुराण के श्रवण और पूजन के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भक्ति और प्रेम का गहरा एवं अटूट संबंध है। उन्होंने पंचाक्षर मंत्र को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिवपुराण शिव-भक्ति का आधार है, जो साधक को आत्म-साक्षात्कार और मानसिक शांति की दिशा में अग्रसर करता है।

महाराज जी ने स्पष्ट किया कि बाह्य आडंबर की अपेक्षा मन की निर्मलता अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने ‘निर्मल मन जन सो मोहि पावा’ के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक मन में कपट, छल और द्वेष विद्यमान रहता है, तब तक ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं है। इसलिए पहले मन रूपी आंगन को शुद्ध करना आवश्यक है।

उन्होंने नर्मदेश्वर महादेव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि शिवलिंग चाहे मिट्टी, पत्थर या गाय के गोबर से निर्मित हो, सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा ही पूर्ण फल प्रदान करती है। साथ ही उन्होंने भक्तों को मानसिक पूजा का महत्व समझाते हुए 52 शक्तिपीठों और द्वादश ज्योतिर्लिंगों के प्रति आस्था रखने का आह्वान किया।

इस आध्यात्मिक आयोजन से संपूर्ण क्षेत्र शिवमय वातावरण में परिवर्तित हो गया है। पांडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही, वहीं अनेक संत-महात्माओं का भी आगमन हुआ। यह आयोजन 17 जून तक प्रतिदिन सायं 4 बजे से 7 बजे तक शिवपुराण कथा के श्रवण के साथ जारी रहेगा।

Pratahkal Bureau

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