भारतीय शिक्षा पद्धति केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के शरीर, प्राण, मन, बुद्धि और आत्मा के समग्र एवं संतुलित विकास की आधारशिला है। जब शिक्षा इन सभी आयामों को एक सूत्र में पिरोती है, तभी एक श्रेष्ठ, संस्कारित और राष्ट्रनिष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण संभव होता है। यही भारतीय शिक्षा दर्शन की मूल अवधारणा है, जिस पर विद्या भारती की शिक्षण व्यवस्था आधारित है।

यह विचार विद्या भारती के तत्वावधान में श्री सच्चियाय आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय, ओसियां में आयोजित प्रांतीय योग तथा नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा कार्यशाला के वैचारिक सत्र में क्षेत्रीय योग शिक्षा संयोजक राजेंद्र कुमार शर्मा ने व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती एवं भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और वंदना के साथ हुआ।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए शर्मा ने भारतीय संस्कृति में वर्णित पंचकोश की अवधारणा को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश और आनंदमय कोश मानव व्यक्तित्व के पांच प्रमुख आधार स्तंभ हैं। इन सभी कोशों का संतुलित एवं समन्वित विकास व्यक्ति को उत्कृष्ट, चरित्रवान, संस्कारित तथा समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बनाता है।

उन्होंने पंचकोशात्मक विकास को दीपक के उदाहरण से स्पष्ट करते हुए बताया कि जिस प्रकार दीपक का पात्र, तेल, बाती, लौ और प्रकाश मिलकर पूर्ण उजाला प्रदान करते हैं, उसी प्रकार शरीर, प्राणशक्ति, मन, बुद्धि और आत्मा का समन्वय जीवन को सार्थक और प्रकाशमान बनाता है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती की शिक्षा पद्धति इसी समग्र दृष्टिकोण पर आधारित है, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को लक्ष्य बनाकर कार्य कर रही है। यही कारण है कि विद्या भारती के विद्यालय राष्ट्र निर्माण के सशक्त केंद्र के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कार्यक्रम में चेतनानंद, राधाकृष्ण, मधुसूदन, नेमीचंद, रामगोपाल और अरुण कुमार सहित अनेक आचार्य-दीदी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रांत योग शिक्षा संयोजक संग्राम सिंह काला तथा नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा संयोजक राम सिंह ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से व्यक्तित्व के पंचकोशीय विकास की अवधारणा को व्यवहारिक रूप देना तथा विद्यालयों में योग, नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा आधारित शिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाना है।

राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यशाला ने भारतीय शिक्षा दर्शन की उस समग्र सोच को पुनः रेखांकित किया, जिसमें शिक्षा को केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और राष्ट्र निर्माण का सशक्त साधन माना गया है। इसकी जानकारी जिला संवाददाता अजय सिंह द्वारा दी गई।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

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