बारां में गूंजा राष्ट्रवाद का शंखनाद: 'राष्ट्र बदलना है तो खुद को बदलें', हिंदू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब
बारां के कोटा रोड स्थित आदर्श बस्ती में आयोजित भव्य हिंदू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब। राष्ट्रीय कवि राजेंद्र गौड ने 'स्वयं के बदलाव से राष्ट्र परिवर्तन' का मंत्र देते हुए समाज को एकजुट होने का आह्वान किया। कश्मीर और बांग्लादेश के हालातों पर चर्चा के साथ राष्ट्रवाद की गूंज और भव्य शोभायात्रा ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

बारां। राजस्थान के बारां शहर स्थित कोटा रोड की आदर्श बस्ती आज भक्ति और राष्ट्रप्रेम के अनूठे संगम की साक्षी बनी। हिंदू सम्मेलन के भव्य आयोजन ने न केवल धर्म की ध्वजा फहराई, बल्कि समाज को एकजुटता और आत्म-चिंतन का कड़ा संदेश भी दिया। विभिन्न कॉलोनियों से निकली मनमोहक झांकियों और भव्य शोभायात्रा के साथ शुरू हुआ यह कार्यक्रम एक विशाल धर्म सभा में तब्दील हो गया, जिसने पूरे शहर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
शोभायात्रा के दौरान समूचा मार्ग 'जय श्री राम' और 'भारत माता की जय' के उद्घोष से गुंजायमान रहा। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी मातृशक्ति और उत्साह से लबरेज युवाओं की टोली ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। यात्रा में सबसे प्रमुख आकर्षण भारत माता की जीवंत झांकी और हनुमान स्वरूप में सजी वानर सेना रही, जिसे देखने के लिए सड़कों के दोनों ओर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। विभिन्न क्षेत्रों से आई इन झांकियों का संगम जब कार्यक्रम स्थल पर हुआ, तो वहां का दृश्य विहंगम हो उठा।
धर्म सभा को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांत उपाध्यक्ष एवं प्रसिद्ध राष्ट्रीय कवि राजेंद्र गौड ने वैचारिक क्रांति का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि हम राष्ट्र को बदलना चाहते हैं, तो इसकी शुरुआत स्वयं के परिवर्तन से होनी चाहिए। गौड ने जोर देकर कहा कि व्यक्ति, परिवार और समाज में सकारात्मक बदलाव ही राष्ट्र को पुनः सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध बना सकता है। उन्होंने जनसमूह को प्रेरित करते हुए कहा कि जब हमारी सोच बदलती है, तभी आचरण में सुधार आता है और अंततः व्यवस्था परिवर्तित होती है। राष्ट्रीय पुनर्निर्माण को उन्होंने एक दिन का कार्य न बताकर एक सतत साधना और सामूहिक संकल्प की संज्ञा दी।
वर्तमान वैश्विक और राष्ट्रीय परिस्थितियों पर प्रहार करते हुए राजेंद्र गौड ने कश्मीर से हिंदुओं के पलायन और बांग्लादेश के मौजूदा हालातों का जिक्र कर उपस्थित जनसमुदाय को भविष्य की चुनौतियों के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि जब नागरिक जागरूक और समाज संगठित होता है, तभी राष्ट्र एक बार फिर विश्वगुरु बनने की राह पर अग्रसर हो सकता है। कार्यक्रम के दौरान मंच पर संरक्षक के रूप में हीरालाल नागर, सुरेंद्र हाडा, मथुरा लाल वर्मा, ओम चौधरी, भगवती प्रसाद शर्मा तथा कथावाचक द्वारिका प्रसाद गौतम की गरिमामयी उपस्थिति रही।
विशिष्ट वक्ता कुसुमलता जैन ने मातृशक्ति की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए समय की मांग के अनुरूप खुद को ढालने और जागरूक बनने की बात कही। वहीं, राष्ट्रीय कवि सुरेंद्र यादवेंद्र ने अपनी ओजस्वी कविताओं के माध्यम से उपस्थित जनसमूह में जोश का संचार कर दिया। कार्यक्रम का समापन भारत माता की सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। यह सम्मेलन केवल एक धार्मिक आयोजन न रहकर, समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए राष्ट्र रक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक सशक्त मंच बनकर उभरा, जिसकी गूंज लंबे समय तक बारां के गलियारों में सुनाई देगी।

Pratahkal Bureau
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