भारतीय शिक्षा व्यवस्था को भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और ज्ञान परंपरा से जोड़ने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह बात विद्या भारती चित्तौड़ प्रांत के मंत्री डॉ. सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा ने बुधवार को आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित नव चयनित आचार्य विकास वर्ग में कही।

विद्या भारती के तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण वर्ग में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 विषय पर मार्गदर्शन देते हुए डॉ. अरोड़ा ने कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीयता, नैतिकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह नीति विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी और जागरूक नागरिक के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखती है।

अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय ज्ञान परंपराओं, संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाले प्रमुख संवाहक हैं। उनके अनुसार शिक्षक ही सशक्त, स्वाभिमानी और विकसित राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं।

कार्यक्रम के दौरान वर्ग संयोजक राजेन्द्र कुमार शर्मा ने अतिथि का स्वागत करते हुए उनका परिचय प्रस्तुत किया। वहीं वर्ग प्रबंध प्रमुख अमृतलाल ने बताया कि आचार्य विकास वर्ग में विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है, जिससे नव चयनित आचार्यों को शैक्षिक और वैचारिक रूप से सुदृढ़ बनाया जा सके।

कार्यक्रम का समापन संगीत आचार्य राजेन्द्र रावल के नेतृत्व में सामूहिक वंदे मातरम् के गायन के साथ हुआ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय मूल्यों पर केंद्रित यह चिंतन सत्र शिक्षकों की भूमिका और शिक्षा के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण संदेश देने वाला साबित हुआ।

Pratahkal Bureau

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