नई शिक्षा नीति में मातृभाषा पर जोर, डॉ. सुरेंद्र अरोड़ा बोले- प्रभावी होगी शिक्षा
कोटा में विद्या भारती के प्रशिक्षण वर्ग में डॉ. सुरेंद्र अरोड़ा ने मातृभाषा को व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक जड़ों के लिए अनिवार्य बताया।

कोटा के स्वामी विवेकानंद विद्या निकेतन में आयोजित प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग के दौरान मंचासीन मुख्य वक्ता डॉ. सुरेंद्र अरोड़ा एवं अन्य गणमान्य पदाधिकारी।
विद्या भारती राजस्थान क्षेत्र के तत्वावधान में कोटा के महावीर नगर स्थित स्वामी विवेकानंद विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित 11 दिवसीय क्षेत्रीय नवीन प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग के बौद्धिक सत्र में शिक्षा के भविष्य और भाषाई गौरव पर गहन विमर्श किया गया। रविवार को आयोजित इस महत्वपूर्ण सत्र में मुख्य वक्ता डॉ. सुरेंद्र अरोड़ा ने 'मातृभाषा का गौरव' विषय पर अपना सारगर्भित उद्बोधन देते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मात्र सूचनाओं का हस्तांतरण नहीं, बल्कि बालक के चिंतन और समग्र व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है।
डॉ. अरोड़ा ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि यदि बालक की प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में होती है, तो वह जटिल विषयों को भी सहजता से आत्मसात कर पाता है, जिससे उसके आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति की क्षमता और समझ में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मातृभाषा में शिक्षण न केवल बौद्धिक विकास के लिए आवश्यक है, बल्कि इसके माध्यम से ही बालक भारतीय संस्कृति और संस्कारों को गहराई से आत्मसात कर पाता है। डॉ. अरोड़ा के अनुसार, किसी भी संस्कृति की जड़ें उसकी मातृभाषा में ही निहित होती हैं और मातृभाषा के अभाव में दी जाने वाली शिक्षा सदैव अधूरी रहती है।
विश्व पटल पर भारत की पहचान और महापुरुषों के विचारों को रेखांकित करते हुए उन्होंने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, कल्पना चावला, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महान व्यक्तित्वों का उदाहरण दिया, जो सदैव मातृभाषा में शिक्षा के प्रखर पक्षधर रहे। डॉ. अरोड़ा ने जापान जैसे विकसित राष्ट्रों का दृष्टांत देते हुए कहा कि जो राष्ट्र अपनी भाषा में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, वे आज प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इस नीति में कक्षा पांच तक मातृभाषा में शिक्षण को विशेष महत्व प्रदान किया गया है। इससे बालकों में न केवल सृजनात्मकता बढ़ेगी, बल्कि विषयों की एक मजबूत नींव भी तैयार होगी।
इस गरिमामयी अवसर पर अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री श्रीराम आरावकर, राजस्थान के संगठन मंत्री गोविंद कुमार, प्रांत निरीक्षक नवीन कुमार झा और जयपुर महानगर अध्यक्ष राममोहन गर्ग की विशिष्ट उपस्थिति रही। कार्यक्रम का औपचारिक समापन वंदे मातरम के सामूहिक गान के साथ हुआ। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. महेश शर्मा ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए आयोजन को शिक्षा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
