जैन जोड़ला मंदिर में भगवान का अभिषेक-शांतिधारा, मुनिश्री ने बताया मानवता का महत्व
बारां के जैन जोड़ला मंदिर में अभिषेक-शांतिधारा के बाद मुनिश्री ने करुणा, मानवता और गुरु श्रद्धा का महत्व बताया, आहार चर्या भी हुई।

तस्वीर में जैन जोड़ला मंदिर में धर्मसभा के दौरान मुनिश्री गुरुदत्त सागर महाराज श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं।
आचार्य निर्भय सागर महाराज के शिष्य मुनिश्री गुरुदत्त सागर महाराज एवं क्षुल्लक मेरुदत्त सागर महाराज के सान्निध्य में रविवार को जैन जोड़ला मंदिर में भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा श्रद्धा-भक्ति के साथ संपन्न हुई। धार्मिक अनुष्ठान के बाद आयोजित धर्मसभा में मुनिश्री गुरुदत्त सागर महाराज ने मनुष्यता, करुणा और गुरु के प्रति श्रद्धा को जीवन की सबसे बड़ी पहचान बताया।
मुनिश्री ने कहा कि आज समाज में संवेदनशीलता और मनुष्यता का भाव कम होता जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई दृष्टिहीन व्यक्ति सड़क पार करने के लिए परेशान हो और आसपास लोग मौजूद हों, तो किसी एक व्यक्ति को आगे बढ़कर उसकी मदद करनी चाहिए। यह कोई उपकार नहीं, बल्कि मनुष्य होने के नाते हमारा कर्तव्य है। सामने वाला पीड़ा में हो, पुकार रहा हो या सहायता मांग रहा हो और हम उसकी मदद करने के बजाय अनदेखा कर दें, तो यह मानवता के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि सच्ची करुणा महापुरुषों और संतों के जीवन में दिखाई देती है। गुरु के प्रति श्रद्धा केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनकी सेवा, वैयावृत्ति और उनके बताए मार्ग पर चलने में दिखाई देनी चाहिए।
मुनिश्री ने दिगंबर साधु की महिमा बताते हुए कहा कि दिगंबर संत से हमारी पहचान सांसारिक रिश्तों से नहीं, बल्कि जिनेंद्र भगवान और धर्म से होती है। साधु की सेवा, वैयावृत्ति और आहारदान को धर्म में विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से दिगंबर मुनियों के दर्शन को शुभता और विजय का प्रतीक बताया।
उन्होंने कबीर के दोहे का उल्लेख करते हुए गुरु की महत्ता समझाई और कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा और विनम्रता बनाए रखना आवश्यक है। मनुष्य की असली पहचान धन, पद या रिश्तों से नहीं, बल्कि उसकी करुणा, संवेदनशीलता और मानवता से होती है।
धर्मसभा के बाद मुनिश्री की आहार चर्या भी श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पड़गाहन कर आहार चर्या में सहभागिता की। इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। श्रद्धालुओं ने साधना, संयम और धर्म के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
