बारां जिला मुख्यालय पर राष्ट्रीय आयुष मिशन और आयुर्वेद विभाग राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय निःशुल्क आयुर्वेद अंतरंग क्षारसूत्र शल्य चिकित्सा शिविर ने पहले ही दिन सेवा, समर्पण और चिकित्सा की नई मिसाल पेश की है। जनसेवा के इस महाअभियान का आगाज होते ही शिविर स्थल पर पीड़ित मानवता का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां उम्मीद की किरण लेकर आए गंभीर रोगियों को आयुर्वेद की प्राचीन और सटीक पद्धति से तत्काल राहत प्रदान की गई। शिविर के पहले ही दिन शल्य चिकित्सकों की टीम ने तत्परता दिखाते हुए 46 रोगियों का सफल ऑपरेशन कर उन्हें नवजीवन प्रदान किया, जबकि अब तक कुल 76 गंभीर रोगियों का ऑपरेशन के लिए चयन किया जा चुका है। यह शिविर आगामी 31 जनवरी तक अनवरत रूप से अपनी सेवाएं देता रहेगा।

आयुर्वेद विभाग के उप निदेशक डॉ. वीरेंद्र कुमार सोहाया ने शिविर की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यहाँ चिकित्सा का स्तर किसी उच्च स्तरीय अस्पताल से कम नहीं है। शिविर में विशेष रूप से डॉ. कौशल गौतम और डॉ. गोविंद मीणा जैसे अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा आयुर्वेद की विख्यात 'क्षारसूत्र पद्धति' के माध्यम से गुदा रोगों और असाध्य मानी जाने वाली बीमारियों जैसे पाइल्स (बवासीर), फिशर और भगंदर का सफल ऑपरेशन किया जा रहा है। केवल शल्य चिकित्सा ही नहीं, बल्कि यह शिविर समग्र स्वास्थ्य सुधार का केंद्र बन गया है। यहाँ जटिल रोगों जैसे प्रमेह, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, चर्म रोग, पुराने जोड़ों के दर्द, गठिया और उदर रोगों के लिए भी पंचकर्म, अग्निकर्म, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से परामर्श और उपचार दिया जा रहा है।

शिविर की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बहिरंग विभाग (OPD) में भारी भीड़ जुटी और अब तक कुल 2720 रोगियों ने अपना पंजीकरण करवाकर स्वास्थ्य लाभ उठाया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पंचकर्म विभाग में 144, अग्निकर्म व विधकर्म में 154, और जरावस्था (वृद्धावस्था) जन्य रोगों से ग्रसित 72 बुजुर्गों ने विशेष चिकित्सा ली। इसके अलावा स्त्री रोग विभाग में 53 महिलाओं और योग-प्राकृतिक चिकित्सा में 40 लोगों ने परामर्श लिया। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से 60 नौनिहालों को स्वर्ण प्राशन संस्कार भी करवाया गया, जबकि 1454 अन्य सामान्य रोगियों को भी दवा और परामर्श उपलब्ध कराया गया।

शिविर प्रभारी डॉ. कमलेश कंवरिया ने व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए बताया कि अंतरंग विभाग में भर्ती होने वाले सभी रोगियों की आवश्यक जांचें पूरी कर 24 जनवरी से ही ऑप्रेशन शुरू कर दिए गए थे। भर्ती रोगियों की सुविधा का पूरा ख्याल रखते हुए उनके रहने, पौष्टिक भोजन और औषधियों की व्यवस्था पूर्णतः निःशुल्क की गई है। महिला रोगियों के लिए विशेष संवेदनशीलता बरतते हुए अलग वार्ड और अनुभवी महिला चिकित्सकों की तैनाती की गई है। शिविर का एक मुख्य उद्देश्य महिलाओं में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं का जड़ से निवारण करना है। यहाँ अनियमित मासिक धर्म, हार्मोनल असंतुलन, बांझपन, थायराइड और रजोनिवृत्ति जैसी समस्याओं के लिए नाड़ी परीक्षण के साथ-साथ विशेष परामर्श सत्र चलाए जा रहे हैं, जिनमें उन्हें आहार-विहार और स्वस्थ जीवनशैली के टिप्स दिए जा रहे हैं।

इस चिकित्सा यज्ञ के बीच देशभक्ति का जज्बा भी देखने को मिला। राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शिविर के कार्मिकों, भर्ती रोगियों और उनके परिजनों ने सामूहिक रूप से राष्ट्र गीत का गायन किया, जिससे पूरा माहौल राष्ट्रभक्ति से सराबोर हो गया। उपनिदेशक ने आमजन से अपील की है कि 25 जनवरी और उसके बाद भी पंजीकरण जारी रहेगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस निःशुल्क सेवा का लाभ उठा सकें। यह शिविर बारां जिले के स्वास्थ्य परिदृश्य में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो रहा है, जो आधुनिक दौर में आयुर्वेद की प्रासंगिकता और प्रभावशीलता को पुनः स्थापित कर रहा है।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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