जालंधर। नई उमंगों और खुशियों के पावन पर्व लोहड़ी की गूंज आज पूरे जालंधर शहर में सुनाई दी, जहाँ परंपरा और आधुनिक उत्साह का एक अनूठा संगम देखने को मिला। पंजाब की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाने वाला यह त्योहार केवल मौसम के बदलाव का ही नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और समृद्धि का संदेश लेकर आया। शहर के विभिन्न हिस्सों में जलती हुई पवित्र लोहड़ी की लपटों ने न केवल शीत लहर के प्रभाव को कम किया, बल्कि समाज में व्याप्त नकारात्मकता को जलाकर सकारात्मकता की ओर बढ़ने का एक सशक्त आह्वान भी किया। यह पर्व समस्त प्रदेशवासियों के लिए नई ऊर्जा और खुशहाली का सूत्रपात बनकर उभरा है।

उत्सव का मुख्य आकर्षण पारंपरिक लोक गीतों की मधुर धुन और ढोल की थाप रही, जिसने वातावरण को पूरी तरह से उत्सवमय बना दिया। कार्यक्रम के दौरान मूंगफली, गजक और रेवड़ियों का प्रसाद वितरित कर खुशियाँ बांटी गईं। इस पावन अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि लोहड़ी का पर्व हमारी उस साझा संस्कृति को दर्शाता है जहाँ हर भेदभाव मिट जाता है और केवल प्रेम व सौहार्द शेष रहता है। सामूहिक रूप से जलाई गई अग्नि के चारों ओर फेरे लेकर लोगों ने सुख-शांति की कामना की और अपनी परंपराओं को सहेजने का संकल्प लिया।

इस भव्य आयोजन और शुभकामनाओं के आदान-प्रदान के क्रम में प्रदेश के गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। इस विशेष अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों को लोहड़ी की हार्दिक बधाई देते हुए एकता और उत्साह के इस संदेश को जन-जन तक पहुँचाया गया। आधिकारिक तौर पर इस आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया गया, जिसमें सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द का पूरा ध्यान रखा गया। पर्व का समापन एक दृढ़ संकल्प के साथ हुआ कि जिस प्रकार अग्नि बुराई को भस्म करती है, उसी प्रकार समाज से कुरीतियों का अंत होगा और प्रदेश निरंतर उन्नति के पथ पर अग्रसर रहेगा।

Pratahkal Bureau

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