बारां। कोटा में प्रस्तावित न्याय भवन के निर्माण के लिए 125 से अधिक पुराने और विशाल पेड़ों को काटे जाने के मामले में कर्णेश्वर पर्यावरण संरक्षण समिति, चम्बल संसद ने आपत्ति दर्ज कराई है। समिति ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, जिला कलेक्टर एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता को न्याय भवन के लिए पेड़ों की कटाई रोकने और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य कराने की मांग रखी।

कर्णेश्वर पर्यावरण संरक्षण समिति, चम्बल संसद की ओर से कहा गया कि न्यायालय के प्रस्तावित नए भवन के लिए 125 से अधिक पुराने और विशाल पेड़ काटे जाएंगे। समिति ने सुझाव दिया कि इन पेड़ों को काटे बिना विकास कार्य कराया जाए तथा ऐसी तकनीक और री-डिजाइन अपनाया जाए, जिससे पर्यावरण प्रभावित न हो। समिति के अनुसार देश में कई जगह पेड़ों को काटे बिना भी विकास कार्य किए गए हैं।

पर्यावरण समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ और राजस्थान सरकार के ‘हरियालो राजस्थान’ की भावना का सम्मान करते हुए पेड़ काटने पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि भविष्य में कोटा के एयरपोर्ट की जमीन पर मिनी सचिवालय के साथ ही न्याय भवन बनवाया जा सकता है, जिससे पर्यावरण का संरक्षण हो और संविधान की भावना का सम्मान किया जा सके।

समिति ने यह भी कहा कि उनके पास ग्रीन बिल्डिंग तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद हैं। यदि उचित समझा जाए तो विकास कार्य में उनकी सेवाएं ली जा सकती हैं।

इस प्रतिनिधिमंडल में समिति अध्यक्ष राजेंद्र गंभीर, संरक्षक सेवानिवृत्त कलेक्टर पीसी पवन, चम्बल संसद अध्यक्ष केबी नंदवाना, गायत्री परिवार के जीडी पटेल, संरक्षक यज्ञदत्त हाडा, किसान नेता दशरथ कुमार, संयोजक बृजेश विजयवर्गीय, उपाध्यक्ष अनिता चौहान और वीनस विज सहित अन्य मौजूद रहे। समिति की आपत्तियों का केंद्र प्रस्तावित न्याय भवन के लिए पुराने और विशाल पेड़ों की कटाई रोकते हुए पर्यावरण संरक्षण के अनुरूप विकास कार्य कराना है।

Pratahkal Newsroom

Pratahkal Newsroom

प्रातःकाल न्यूज़-रूम, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, समयबद्ध और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा न्यूज़-रूम राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story