बारां। भारतीय इतिहास संकलन समिति बारां के इतिहासकारों ने नयापुरा में अंग्रेजों के कब्रिस्तान में ब्रिटिश मेजर की कब्र पर लगे शिलालेख पर 1857 की क्रांति के नायकों के लिए लिखे गए आपत्तिजनक शब्दों का कड़ा विरोध किया है। बारां जिले के इतिहासकारों ने इस संबंध में अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए प्रशासन से सुधार की मांग की है।

क्रांतिकारियों के लिए आपत्तिजनक शब्दावली पर कड़ा रोष

इतिहासकारों ने बताया कि कोटा की क्रांति देश की क्रांति का अहम हिस्सा थी। नयापुरा स्थित अंग्रेजों के कब्रिस्तान में बने उस समय के मेजर चार्ल्स एनेअस बर्टन के स्मारक पर लगे शिलालेख पर भारतीय क्रांतिकारियों के बारे में बेहद आपत्तिजनक भाषा लिखी हुई है। इस शिलालेख में क्रांतिकारियों के लिए "खून के प्यासे बदमाश" शब्द लिखना अनुचित ही नहीं बल्कि देश के इतिहास को शर्मसार करने वाला है। समिति अध्यक्ष डॉ. सुरेश मेघवाल ने विरोध करते हुए कहा कि "यह शिलालेख हटाकर क्रांतिकारियों के वीर कार्यों को स्थान देना चाहिए क्योंकि किसी भी आक्रमणकारी की बड़ाई करने वाला कोई भी स्मारक पट्टी हमारी धरोहर की श्रेणी में नहीं आ सकती।"

इतिहास को सही रूप में प्रस्तुत करने की मांग

डॉ. सुरेश मेघवाल ने जोर देकर कहा कि यह स्मारक इतिहास से जुड़ा है और 1857 की क्रांति की स्मृति के लिए यह धरोहर सुरक्षित होनी चाहिए, लेकिन इतिहास को सही लिखा जाना चाहिए और इस शिलालेख को तुरंत हटाना चाहिए। इतिहासकार जिला महासचिव डॉ. हेमलता वैष्णव ने विरोध करते हुए कहा कि "स्वतंत्रता सेनानियों की देशभक्ति आंदोलन की सही और प्रमाणिक जानकारी देने वाले शिलालेख लगाना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है ताकि सही शोध कार्य हो सके और युवाओं को सही जानकारी प्राप्त हो सके जिससे भारतीय सनातनी वीर योद्धाओं का इतिहास सही रूप से समझाया जा सके।" ---

इतिहासकारों और बुद्धिजीवियों का एकजुट आह्वान

इतिहासकार डॉ. ज्योति गुप्ता ने अपनी बात रखते हुए कहा कि "क्रांतिकारियों के लिए ऐसा लिखना गलत है और इसमें बदलाव करने की सख्त आवश्यकता है।" इस शिलालेख को तत्काल प्रशासनिक प्रक्रिया और प्रयासों से हटाने की मांग करने वालों में युवा जिलाध्यक्ष डॉ. जयश्री मेम, डॉ. अतुल श्रीवास्तव, मनीष सुमन, दीपक मेहरा, डॉ. मुकेश यादव, डॉ. सुरेश वैष्णव, डॉ. दत्तात्रेय गौतम, डॉ. अशोक धाबाई, डॉ. माधुरी तोमर, कॉलेज छात्रा इकाई अध्यक्ष प्रिया मीणा, ऐश्वर्या शर्मा, बिन्दिया और डॉ. राजाराम धाकड़ शामिल हैं। इन सभी ने एक स्वर में कहा है कि क्रांति के नायकों का यह अपमान अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और वर्तमान पीढ़ी को सही इतिहास से अवगत करवाना अनिवार्य है।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

Next Story