कोटा न्यायालय भवन के लिए पेड़ काटने पर पर्यावरण प्रेमियों की आपत्ति, एयरपोर्ट जमीन का सुझाव
कोटा न्यायालय के प्रस्तावित भवन के लिए नयापुरा में 129 संरक्षित पेड़ों को काटने के निर्णय पर पर्यावरण प्रेमियों ने आपत्ति जताई है। एयरपोर्ट की जमीन पर भवन बनाने और पेड़ों को बचाने की मांग उठी।

तस्वीर में विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और पर्यावरण प्रेमी कोटा में एक खुले स्थान पर बैठक करते हुए नजर आ रहे हैं।
कोटा न्यायालय के प्रस्तावित नए भवन के लिए नयापुरा की हरी-भरी साइट पर 129 विभिन्न संरक्षित प्रजातियों के पेड़ों को काटने के निर्णय पर पर्यावरण प्रेमियों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने पेड़ों को बचाते हुए निर्माण कार्य कराने की मांग की है और ऐसा संभव नहीं होने पर पुराने एयरपोर्ट की जमीन को न्यायालय भवन के लिए उपयुक्त विकल्प बताया है।
पर्यावरण प्रेमियों ने बारां में कोटा रोड स्थित पब्लिक गार्डन में लगभग 50 साल से फल-फूल रहे तकरीबन डेढ़ दर्जन से अधिक विशाल वृक्षों को सरेआम काटे जाने की भी निंदा की। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि उक्त घटना की शिकायत जिला कलेक्टर से किए जाने के बावजूद आज तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। उन्होंने इसे बड़ी अनदेखी बताया।
कोटा न्यायालय के प्रस्तावित भवन के संदर्भ में पर्यावरण प्रेमियों ने निर्माण एजेंसी को सुझाव दिया कि पेड़ों को बचाते हुए निर्माण कार्य किया जाए। इसके लिए निर्माण की रि-डिजाइन करने की बात कही गई। यदि यह संभव नहीं हो तो न्यायालय भवन का निर्माण पुराने एयरपोर्ट की जमीन पर करने का सुझाव दिया गया।
बुधवार शाम कर्णेश्वर पर्यावरण संरक्षण समिति के स्मृति वन में आयोजित बैठक में विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से कहा कि निर्माण कार्य में पेड़ों को बचाया जाए और आवश्यकता होने पर भवन की रि-डिजाइन की जाए। अन्यथा भवन को हवाई अड्डे की जमीन पर बनाया जाए, जहां मिनी सचिवालय भी प्रस्तावित है। इससे पर्यावरण एवं विकास में संतुलन कायम रह सकेगा।
बैठक में समिति के अध्यक्ष राजेंद्र गंभीर, चम्बल संसद के अध्यक्ष के बी नंदवाना, उपाध्यक्ष अनिता चौहान, गायत्री परिवार बोरखेड़ा के संचालक यज्ञदत्त हाडा, गायत्री परिवार के जीडी पटेल, चम्बल संसद के संयोजक बृजेश विजयवर्गीय, पूर्व पार्षद युधिष्ठर चानसी, इंटेक के सक्रिय सदस्य अनिल शर्मा, राजकुमार शर्मा के अलावा सुखविंदर कपूर, सचिव दीप्ति अरोड़ा, डा विनीत महोबिया और वीनस विज मौजूद रहे।
प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार को विकास के नाम पर पर्यावरण को खत्म नहीं करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ और राजस्थान सरकार के ‘हरियालो राजस्थान’ की भावना का सम्मान करने की बात कही।
समिति के महासचिव बृजेश विजयवर्गीय ने बताया कि इस संबंध में शीघ्र ही जिला कलेक्टर और सार्वजनिक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को सुझाव पत्र दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर पूजा भी की जाएगी। आवश्यकता हुई तो आंदोलन किया जाएगा।

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