अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में पानी की टंकी पर चढ़े लोग, 70 साल पुराने कब्जे का किया दावा
बारां में नगर परिषद की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में लोग पानी की टंकी पर चढ़ गए। प्रदर्शनकारियों ने 70 साल पुराने कब्जे का दावा करते हुए राजनीतिक दबाव के आरोप लगाए। देर शाम तक चला समझाइश का दौर।

कोटा-बारां रोड के समीप बुधवार को अतिक्रमण हटाए जाने की कार्रवाई के विरोध में पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन करते स्थानीय निवासी, जिन्हें समझाने के लिए कोतवाली पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
शहर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई उस समय विवाद का रूप ले गई जब नगर परिषद की टीम के पहुंचने पर कुछ लोग विरोध स्वरूप नलका रोड स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि वे पिछले लगभग 70 वर्षों से संबंधित भूमि पर निवास कर रहे हैं और उन्हें वहां से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। घटना के बाद मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए कोतवाली थाना पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, बुधवार को नगर परिषद का अतिक्रमण निरोधक दस्ता शहर के कोटा-बारां रोड स्थित सिविल लाइंस क्षेत्र के समीप नलका रोड पर पहुंचा। यहां पानी की टंकी के आसपास स्थित पुरानी बस्ती में बने कच्चे और पक्के मकानों को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी। इस दौरान स्थानीय निवासियों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए नगर परिषद अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष रखा, लेकिन कार्रवाई जारी रहने पर विरोध और तेज हो गया।
विरोध कर रहे कुछ महिला और पुरुष पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गए और वहीं से प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि जिस भूमि पर वे दशकों से रह रहे हैं, उस पर एक भाजपा नेता की नजर लंबे समय से बनी हुई है। उनका कहना था कि संबंधित भूमि को खाली करवाने के पीछे राजनीतिक दबाव और निजी स्वार्थ की भूमिका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पूर्व में कई बार धमकियां दी जा चुकी हैं।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी स्थिति में उक्त भूमि को नहीं छोड़ेंगे, क्योंकि उनका परिवार और समुदाय पिछले लगभग सात दशकों से वहां निवास कर रहा है। दूसरी ओर, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाने का प्रयास शुरू किया।
शहर कोतवाल हीरालाल पूनिया ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को समझाने और स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के प्रयास देर शाम तक जारी रहे। समाचार लिखे जाने तक विरोध कर रहे लोग पानी की टंकी से नीचे नहीं उतरे थे और प्रशासनिक स्तर पर वार्ता का दौर जारी था।
यह घटना शहर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर उत्पन्न संवेदनशीलता और प्रशासन तथा स्थानीय निवासियों के बीच बने विवाद को उजागर करती है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वार्ता के जरिए इस गतिरोध का समाधान किस प्रकार निकाला जाता है।

Pratahkal Bureau
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