किसानों की समस्याओं पर आर-पार की लड़ाई: समाधान न होने पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
बारां के किशनगंज में किसानों और गरीबों की समस्याओं को लेकर फूटा गुस्सा! बुनियादी सुविधाओं और खाद की किल्लत पर प्रशासन को मिला अल्टीमेटम, मांगें पूरी न होने पर शुरू होगा बड़ा आंदोलन। जानिए क्या है पूरा मामला।

राजस्थान किसान मजदूर नौजवान सभा के जिलाध्यक्ष अंशदीप सिंह फौजी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने किशनगंज उपखंड अधिकारी को जनसमस्याओं के निराकरण हेतु ज्ञापन सौंपा।
बारां/किशनगंज। राजस्थान किसान मजदूर नौजवान सभा के कार्यकर्ताओं ने किसानों और आम नागरिकों की गंभीर समस्याओं के त्वरित निवारण की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। जिलाध्यक्ष अंशदीप सिंह फौजी के नेतृत्व में आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने उपखंड अधिकारी किशनगंज को एक ज्ञापन सौंपकर प्रशासन को सीधे तौर पर चेताया है कि यदि आगामी 29 जून तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे। इस आंदोलन को भारतीय किसान यूनियन का भी पुरजोर समर्थन मिला है।
ज्ञापन के माध्यम से क्षेत्र की कई ज्वलंत समस्याओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संपूर्ण किशनगंज तहसील के अन्नदाता इस समय खाद और उर्वरक जैसे डीएपी व यूरिया की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं, जिसके कारण उन्हें पर्याप्त मात्रा और वाजिब दाम पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इतना ही नहीं, स्थानीय पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त मात्रा में डीजल न मिलने से किसान अपने खेतों की जुताई भी ढंग से नहीं कर पा रहे हैं। कृषि संकट के अलावा, क्षेत्र के बुजुर्गों और महिलाओं को पेंशन से संबंधित दस्तावेजों के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साक्षरता की कमी और सही जानकारी न होने के चलते कई पात्र लोग पेंशन से वंचित हैं, जिसके समाधान के लिए तहसील स्तर पर एक विशेष सुविधा केंद्र या पेंशन कार्यालय स्थापित करने की मांग की गई है।
इसके साथ ही, बुनियादी सुविधाओं की बदहाली का मुद्दा उठाते हुए बताया गया कि बारिश के मौसम में सरकारी स्कूलों के आसपास भारी कीचड़ और गड्ढे हो जाते हैं, जिससे स्कूली बच्चों को आने-जाने में भारी कठिनाई होती है। कार्यकर्ताओं ने मॉनसून से पहले इन गड्ढों को भरने और सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है। वहीं, किशनगंज तहसील के आदिवासी और गरीब परिवारों के आवास का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया गया है, जो आज भी झोपड़ियों और कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं और सरकारी आवास योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। भारतीय किसान यूनियन जिला बारां के जिलाध्यक्ष बलवंत सिंह मीणा, जिला सचिव राजू बिलाशगढ़, अंकित धाकड़, अंकुश चौधरी, गंगाराम बंजारा, प्रेमनारायण और सागर सहरिया सहित कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी में दिए गए इस ज्ञापन ने अब स्थानीय प्रशासन पर त्वरित और निर्णायक कदम उठाने का भारी दबाव बना दिया है।

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