बारां। राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम बमूलिया के समीप स्थित श्री गुणवर्धन शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर तीर्थ रविवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का केंद्र बना, जब जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ का जन्म कल्याणक महोत्सव पूरे विधि-विधान और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। दशमी के पावन अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई और भगवान के उपदेशों को आत्मसात किया।

तीर्थ की अध्यक्ष एवं बारां जिला प्रमुख श्रीमती उर्मिला जैन भाया ने इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि भगवान श्री पार्श्वनाथ ने अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और करुणा के सिद्धांतों के माध्यम से मानवता को शांति, सहअस्तित्व और आत्मोन्नति का मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर के उपदेश आज भी समाज को नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की निरंतर प्रेरणा देते हैं और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है।

समाज अध्यक्ष राजेन्द्र रंगावट एवं अशोक कुमार बोरडिया ने बताया कि जन्म कल्याणक महोत्सव के लाभार्थी विधायक अन्ता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रमोद जैन भाया, जिला प्रमुख श्रीमती उर्मिला जैन भाया, यश जैन भाया सहित समस्त पारख-कोठारी परिवार रहे। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10 बजे सकल श्रीसंघ द्वारा भगवान श्री पार्श्वनाथ के अभिषेक से हुई। इसके पश्चात 11 बजे पंच कल्याणक पूजा संपन्न कराई गई। दोपहर में स्वामिवात्सल्य का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने सहभागिता की, जबकि सायंकाल महाआरती के साथ महोत्सव का समापन हुआ।

पूजा-अर्चना की समस्त विधियां राजेश पुजारी द्वारा संपन्न कराई गईं। पूरे दिन तीर्थ परिसर भक्ति, मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर रहा। जन्म कल्याणक महोत्सव ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि भगवान पार्श्वनाथ के शाश्वत संदेशों के माध्यम से समाज में शांति, संयम और सद्भाव के मूल्यों को पुनः सशक्त रूप से स्थापित किया।

Pratahkal Bureau

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