अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग के महत्व और उसकी व्यापक उपयोगिता को रेखांकित करते हुए विद्या भारती राजस्थान के योग शिक्षा क्षेत्र संयोजक राजेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि आज सम्पूर्ण विश्व योग को केवल व्यायाम की पद्धति के रूप में नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सार्थक जीवन जीने की जीवनशैली के रूप में स्वीकार कर रहा है। उन्होंने कहा कि 21 जून को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मानवता को स्वास्थ्य, शांति और आत्मबोध का संदेश देता है तथा भारतीय ऋषि परंपरा की यह अमूल्य धरोहर विश्व को तनाव, अवसाद, असंतुलन और भौतिकता की अंधी दौड़ से बाहर निकलने का मार्ग दिखा रही है।

राजेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि महर्षि पतंजलि द्वारा प्रतिपादित अष्टांग योग मानव जीवन के सर्वांगीण विकास का वैज्ञानिक और व्यवस्थित मार्ग है। उनके अनुसार योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की विधि नहीं, बल्कि व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास का आधार है।

उन्होंने कहा कि अष्टांग योग के विभिन्न अंग मानव जीवन को क्रमबद्ध रूप से उत्कृष्टता की ओर अग्रसर करते हैं। यम और नियम व्यक्ति के सामाजिक, नैतिक तथा आत्मानुशासन संबंधी गुणों का विकास करते हैं, जबकि आसन और प्राणायाम शरीर को स्वस्थ, सशक्त और ऊर्जावान बनाते हैं। वहीं प्रत्याहार, धारणा और ध्यान मन को एकाग्र, संतुलित और शांत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अष्टांग योग का अंतिम चरण समाधि है, जिसमें साधक आत्मा और परमात्मा के एकत्व का अनुभव करता है।

उन्होंने आगे बताया कि विद्या भारती की शिक्षा पद्धति पंचकोशीय विकास पर आधारित है, जिसमें शरीर, मन, बुद्धि, प्राण और आत्मा के संतुलित विकास को लक्ष्य बनाया गया है। अष्टांग योग इन सभी आयामों को सुदृढ़ बनाते हुए विद्यार्थियों और आचार्यों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देता है। योग केवल स्वास्थ्य संवर्धन का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना को भी मजबूत करता है।

राजेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में आवश्यकता इस बात की है कि योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। नियमित योगाभ्यास से स्वस्थ शरीर, शांत मन, प्रखर बुद्धि, श्रेष्ठ चरित्र और समर्पित नागरिक का निर्माण संभव है, जो विकसित, समृद्ध और संस्कारित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि योग से जुड़कर स्वयं को जानें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें। उनके अनुसार नियमित योग ही स्वस्थ शरीर, शांत मन, सशक्त बुद्धि और श्रेष्ठ चरित्र का आधार है तथा यही विकसित भारत के निर्माण का सशक्त मार्ग भी है।

Pratahkal Bureau

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