एक शिक्षक का जीवन समाज को गढ़ने में बीतता है, लेकिन मृत्यु के बाद भी शिक्षा का दीप जलता रहे—यह विरले ही संभव होता है। बूंदी जिले के छोटे से गांव अड़ीला निवासी, शिक्षाविद स्वर्गीय छोटूलाल बाथरा ने अपने देहदान के माध्यम से न केवल एक आदर्श स्थापित किया, बल्कि बारां मेडिकल कॉलेज के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय भी जोड़ दिया। उनके पार्थिव शरीर के दान से मेडिकल कॉलेज को स्थापना के बाद पहली बार एनाटॉमी अध्ययन के लिए कैडेवर प्राप्त हुआ है, जिससे भविष्य के डॉक्टर मानव शरीर रचना को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगे।

त्रिमूर्ति बाल उच्च माध्यमिक विद्यालय, अड़ीला के संस्थापक छोटूलाल बाथरा का मंगलवार शाम कोटा में आकस्मिक निधन हो गया था। शोक की उस घड़ी में भी उनके परिवार ने भावनाओं पर नहीं, बल्कि उनके जीवनकाल में लिए गए संकल्प को सर्वोपरि रखा। वर्ष 2021 में भारत विकास परिषद द्वारा आयोजित नेत्रदान-देहदान कार्यशाला से प्रेरित होकर उन्होंने देहदान का संकल्प पत्र भरा था। उनकी इस अंतिम इच्छा को साकार करने में शाइन इंडिया फाउंडेशन और भारत विकास परिषद की कापरेन शाखा ने तत्परता से भूमिका निभाई। पहले कोटा मेडिकल कॉलेज में नेत्रदान संपन्न हुआ और इसके बाद पार्थिव शरीर बारां मेडिकल कॉलेज लाया गया।

बुधवार सुबह अड़ीला गांव में निकली अंतिम यात्रा साधारण नहीं, बल्कि गौरव यात्रा बन गई। शिक्षक द्वारा पढ़ाए गए शिष्यों, सामाजिक संगठनों और परिजनों की उपस्थिति में यह विदाई भावुक भी थी और प्रेरणादायक भी। मुक्तिधाम में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अंतिम संस्कार की औपचारिकताएं पूरी की गईं। श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि एक छोटे से गांव से उठी देहदान की यह मशाल पूरे हाड़ौती क्षेत्र को नई दिशा देगी।

शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ. कुलवंत गौड़ ने बताया कि संस्था 2011 से देहदान और नेत्रदान के क्षेत्र में सक्रिय है और पिछले वर्षों में परिजनों की काउंसलिंग को प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है। उन्होंने कहा कि बारां मेडिकल कॉलेज में अब तक कोई देहदान नहीं हुआ था, इसलिए स्वर्गीय बाथरा का पार्थिव शरीर यहां लाने को प्राथमिकता दी गई। यह पूरे संभाग के लिए गर्व का विषय है।

दोपहर करीब एक बजे जब एंबुलेंस मेडिकल कॉलेज परिसर में पहुंची, तो माहौल श्रद्धा और सम्मान से भर उठा। कॉलेज प्रशासन, फैकल्टी और एमबीबीएस के छात्र कतारबद्ध खड़े थे। पुष्प अर्पित कर सभी ने उस शिक्षक को नमन किया, जो अब ‘मौन अध्यापक’ के रूप में मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की जटिलताओं का पाठ पढ़ाएंगे।

इस अवसर पर दिवंगत की भतीजी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की राइफल शूटर उर्मिला राठौर भावुक हो उठीं। उन्होंने कहा कि बाउजी केवल अभिभावक ही नहीं, बल्कि उनके जीवन के सबसे बड़े मार्गदर्शक थे। उन्हें गर्व है कि अब उनके शरीर से मेडिकल छात्र शिक्षा ग्रहण करेंगे और समाज सेवा के लिए सक्षम डॉक्टर बनेंगे।

बारां मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सी.एम. मीणा ने इस देहदान को चिकित्सा शिक्षा के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि कॉलेज लंबे समय से कैडेवर की प्रतीक्षा कर रहा था। इस दान से छात्रों की व्यावहारिक शिक्षा को नई गति मिलेगी। उन्होंने पूरे परिवार और सहयोगी संस्थाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

भारत विकास परिषद और शाइन इंडिया फाउंडेशन के अनुसार, बारां जिले में अब तक दर्जनों नेत्रदान और देहदान के संकल्प हो चुके हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज को भविष्य में और भी देहदान की आवश्यकता है। छोटूलाल बाथरा का यह निर्णय न केवल चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि समाज में देहदान को लेकर जागरूकता की नई लहर भी पैदा करेगा—यह प्रमाणित करते हुए कि एक सच्चा गुरु कभी रिटायर नहीं होता।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story