हथियादह मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित परिवारों की समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं को लेकर लंबे समय से उठ रही मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से प्रभावित ग्रामीणों में असंतोष गहराता जा रहा है। राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के सचिव एवं कांग्रेस नेता लेखराज शर्मा (करवरी कलां) ने प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रभावित परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।

लेखराज शर्मा ने बताया कि इस संबंध में पूर्व में जिला कलक्टर बारां को ज्ञापन भी सौंपा गया था, लेकिन अब तक समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि परियोजना क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचे सिंचाई विभाग जयपुर द्वारा गठित दल ने केवल तकनीकी पहलुओं का अवलोकन किया, जबकि विस्थापित परिवारों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि निरीक्षण के दौरान पुनर्वास के लिए प्रस्तावित स्थानों पर उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं जैसे पेयजल, बिजली, सड़क और आवास व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन नहीं किया गया। प्रभावित परिवारों की आवश्यकताओं और उनके पुनर्वास से जुड़े संवेदनशील पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

शर्मा के अनुसार, एक ओर विस्थापितों के लिए समुचित पुनर्वास व्यवस्था अब तक सुनिश्चित नहीं की गई है, वहीं दूसरी ओर जल संसाधन विभाग, बारां के अधिकारियों को डूब क्षेत्र में बसे परिवारों को तत्काल क्षेत्र खाली कराने के निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना है कि बिना आवश्यक सुविधाओं और वैकल्पिक व्यवस्था के लोगों को विस्थापन के लिए बाध्य करना गंभीर मानवीय चिंता का विषय है।

उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि जब तक पुनर्वास स्थल पर सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित नहीं हो जातीं और प्रभावित परिवारों की समस्याओं का पूर्ण समाधान नहीं हो जाता, तब तक किसी भी परिवार को विस्थापन के लिए मजबूर नहीं किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाई तो संगठन ग्रामीणों के साथ मिलकर ग्राम पंचायत मुख्यालय पर आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होगा।

हथियादह मध्यम सिंचाई परियोजना से जुड़े इस मुद्दे ने पुनर्वास व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रभावित परिवार अब अपनी मूलभूत जरूरतों और अधिकारों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

Pratahkal Bureau

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