हरिपुरा में प्राकृतिक खेती को नई दिशा: 125 किसानों को मिली जैविक कीटनाशक इकाइयां
बारां जिले के समीपवर्ती गांव हरिपुरा में प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 125 किसानों को जैविक कीटनाशक इकाइयां वितरित की गईं। इस पहल से किसान स्वयं प्राकृतिक कीटनाशक तैयार कर खेती की लागत कम करेंगे, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखेंगे और रसायन मुक्त, टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलेगा।

बारां/हरिपुरा। रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा देने और किसानों की उत्पादन लागत कम करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए जिला मुख्यालय के समीपवर्ती ग्राम हरिपुरा में प्राकृतिक खेती मिशन के तहत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत 125 चयनित किसानों को जैविक कीटनाशक इकाइयों का वितरण किया गया, जिससे वे स्वयं प्राकृतिक कीटनाशक तैयार कर फसलों को कीट एवं रोगों से सुरक्षित रख सकेंगे।
कार्यक्रम का आयोजन ग्राम पंचायत बटावदा के अंतर्गत आने वाले हरिपुरा गांव में किया गया, जहां बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से दूर कर प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों से जोड़ना है, ताकि खेती न केवल लाभकारी बने बल्कि पर्यावरण और मिट्टी की सेहत भी सुरक्षित रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक चंद्रमोहन सुमन ने बताया कि प्राकृतिक खेती मिशन के पहले चरण में चयनित किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्र किए गए थे। इन नमूनों की जांच के आधार पर फसलों की वास्तविक जरूरतों को समझते हुए किसानों को उपयुक्त प्राकृतिक समाधान अपनाने के लिए मार्गदर्शन दिया गया। इसी क्रम में अब किसानों को जैविक कीटनाशक इकाइयां उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि वे अपने स्तर पर कीटनाशक तैयार कर सकें।
जैविक कीटनाशक इकाइयों के माध्यम से किसान अब रासायनिक दवाओं पर निर्भर नहीं रहेंगे। इससे एक ओर जहां खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक कीटनाशकों के उपयोग से पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहता है और लंबे समय में भूमि की उत्पादक क्षमता बढ़ती है।
वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक सुमन ने यह भी जानकारी दी कि मिशन के आगामी चरणों में चयनित किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़े अन्य कार्यों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें जीवामृत, घनजीवामृत और जैविक खाद निर्माण जैसे उपाय शामिल हैं। इन सहायता योजनाओं का उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें प्राकृतिक खेती की संपूर्ण प्रक्रिया से जोड़ना है।
कार्यक्रम के दौरान किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला। किसानों का कहना था कि यह योजना उन्हें सुरक्षित, टिकाऊ और कम खर्च वाली खेती अपनाने में मदद करेगी। कई किसानों ने इसे भविष्य की खेती के लिए एक मजबूत विकल्प बताते हुए कहा कि इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ेगी बल्कि उपभोक्ताओं को भी सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध हो सकेगा।
कार्यक्रम के समापन पर कृषि विभाग की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि प्राकृतिक खेती मिशन के तहत आगे भी किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग निरंतर उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि जिले में प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे।
प्राकृतिक खेती मिशन के तहत हरिपुरा में उठाया गया यह कदम न केवल किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी सिद्ध होगा, बल्कि क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि विकास की दिशा में भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा।

Rajendra Sharma, Baran
नाम: राजेंद्र शर्मा
वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)
कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर
परिचय
राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
- राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
- राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
- दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
- दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
- दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
- अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
