बारां जिला मुख्यालय पर स्थापित ‘ग्राम श्री मार्ट’ से स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को स्थानीय उत्पादों के लिए स्थायी बाजार मिलने की राह खुली है। राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन के सहयोग से मिशन सामर्थ्य- सक्षम सखी योजना के अंतर्गत शुरू किए गए इस मार्ट का मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा ने 17 अगस्त को लोकार्पण किया। इसके माध्यम से ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने, स्थानीय उत्पादों को स्थायी बाजार उपलब्ध कराने तथा वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

मिशन सामर्थ्य- सक्षम सखी के तहत जिले में अब तक कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। जिले के 33 वन धन केंद्रों में मशीनरी एवं टूल-किट उपलब्ध कराकर उनका भौतिक सत्यापन पूरा किया गया है। इनमें से 18 केंद्रों में पैकेजिंग मशीन, वेइंग मशीन तथा मसाला-कम-फ्लोर मिल स्थापित किए गए हैं। वन धन उत्पादों की नई ब्रांडिंग एवं आकर्षक पैकेजिंग की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

बाजार संपर्क बढ़ाने के लिए क्रेता-विक्रेता बैठक एवं बैंकर बैठक आयोजित की गई। इसमें मंजरी फाउंडेशन से आशय पत्र प्राप्त हुआ। इसके साथ ही केवीके अंता में हनी प्रोसेसिंग मशीन तथा एमपीसी खुशहालपुरा में चिरौंजी डिकॉर्टिकेटर मशीन स्थापित की गई है। वन धन उत्पादों के प्रदर्शन एवं विक्रय के लिए जिला मुख्यालय पर ग्राम श्री मार्ट के लिए स्थान आवंटित कर उसका संचालन शुरू किया गया है।

ग्राम श्री मार्ट के माध्यम से अब तक करीब 40 लाख रुपए के उत्पादों की मांग चिन्हित की गई है। इसमें मंजरी फाउंडेशन से 10 लाख रुपए, मिड-डे मील कार्यक्रम के लिए दाल एवं मसालों की 20 लाख रुपए तथा अन्य संस्थाओं से 10 लाख रुपए के उत्पादों की मांग शामिल है। इससे वन धन केंद्रों के उत्पादों को बड़ा बाजार मिलने के साथ एसएचजी महिलाओं की आय में वृद्धि होगी।

जिले में राजीविका स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए समर्थ सखी ऋण योजना के तहत सीएलएफ फील्ड स्टाफ को दोपहिया वाहन के लिए एक लाख रुपए तक तथा पांच क्लस्टर स्टाफ को स्कूटी के लिए ऋण वितरित किए गए हैं। वहीं मुख्यमंत्री लखपति दीदी ऋण योजना के अंतर्गत ऋण सीमा एक लाख रुपए से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपए कर दी गई है।

जिला प्रशासन का संकल्प है कि जिले के स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाकर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाए। ग्राम श्री मार्ट के माध्यम से उत्पादों के लिए चिन्हित मांग इस दिशा में बाजार उपलब्ध कराने की पहल को मजबूती देती है।

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