। पर्यावरण संकट के इस दौर में जहां विकास के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है, वहीं राजस्थान के बारां जिले के गोविंद अटलपुरी वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक अद्वितीय मिसाल पेश कर रहे हैं। वर्ष 1997 में राष्ट्रीय साक्षरता कार्यक्रम से जुड़कर सामाजिक चेतना जगाने वाले ग्राम खेडलीबासला, अटरू निवासी गोविंद अटलपुरी तब से लेकर आज तक निरंतर अपने स्वयं के खर्चे पर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चला रहे हैं। उनके इस निस्वार्थ सेवा भाव का ही परिणाम है कि वे अब तक लगभग 9000 पौधों का वृक्षारोपण करवा चुके हैं, जो आज विशाल वृक्ष बनकर आमजन को प्राणवायु ऑक्सीजन, शीतल छाया और फल दे रहे हैं।

इस दीर्घकालिक हरित अभियान को जीवित रखने के लिए गोविंद अटलपुरी अधिकारिक रूप से शुल्क देकर पौधे खरीदते हैं। वे ज्यादातर समय वन विभाग की कवाई सालपुरा में स्थित नर्सरी से पौधे लेते आ रहे हैं, इसके अलावा उन्होंने छबड़ा, छीपाबड़ौद और बारां में स्थित सरकारी नर्सरियों से भी पौधे लाकर रोपे हैं। उनके इस पौधारोपण अभियान का दायरा बेहद विस्तृत है, जिसके तहत वे कच्ची बस्तियों, सार्वजनिक स्थानों, खेतों, खलिहानों एवं लोगों के घर के आंगनों आदि में वृक्षारोपण करवाते हैं। अब तक उनके द्वारा ग्राम खेडलीबासला, अटरू और अटरू में बांदा रोड स्थित आदिवासी भील बस्ती, वेयरहाउस बस्ती, कलंदर बस्ती तथा बंजारा बस्ती आदि शोषित व पिछड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करवाया जा चुका है। वे केवल पौधा लगाने तक ही सीमित नहीं रहते, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए स्वयं के खर्चे पर ट्री-गार्ड भी उपलब्ध करवाते हैं; वे अब तक लगभग 200 ट्री-गार्ड बस्तियों में दे चुके हैं।

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। यदि हमारा वातावरण स्वच्छ होगा तो प्रकृति सुरक्षित होगी और यदि प्रकृति सुरक्षित होगी तो मानव जीवन भी स्वस्थ और संतुलित रहेगा। वर्तमान समाज में पेड़ों से जो मनुष्य को मिलता है उसकी कद्र इसलिए नहीं है क्योंकि पेड़ पलट कर जवाब-तलब नहीं कर सकते। जो मनुष्य प्रकृति की वास्तविक कीमत जानते हैं, वही आज पेड़ों को पार्किंग और कल-कारखानों के लिए जगह बनाने के नाम पर काटे जाने की राह में रक्षक बनकर खड़े मिलेंगे। हर कटता हुआ पेड़ केवल हरियाली नहीं छीनता, बल्कि पर्यावरण का संतुलन भी कमजोर करता है। ऐसी गंभीर स्थितियों में देश का कानून जागरूक नागरिकों को इस विनाश के विरुद्ध आवाज उठाने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार देता है, जिसका उपयोग कर पर्यावरण को बचाया जा सकता है।

Pratahkal Hub

Pratahkal Hub

प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"

Next Story